जमुई : सावन की बारिश से खैरा के जतहर गांव का संपर्क टूटा; स्कूली बच्चों की पढ़ाई ठप, जान जोखिम में डाल रहे लोग
सावन की बारिश से जमुई के खैरा प्रखंड स्थित जतहर गांव का संपर्क टूट गया है, जिससे स्कूली बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण ...और पढ़ें
HighLights
सावन की बारिश से जतहर गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क टूटा।
पुल न होने से बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज बाधित।
विधायक ने पुल निर्माण के लिए डीपीआर तैयार होने की बात कही।
संवाद सूत्र, खैरा (जमुई)। सावन की रिमझिम और मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित जतहर गांव (हरनी पंचायत) के लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। गांव के सामने बहने वाली करीब 150 मीटर चौड़ी नदी आज भी विकास के तमाम दावों के बीच ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
नदी पर पक्का पुल न होने के कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। हर साल मानसून के दस्तक देते ही ग्रामीणों का जीवन थम सा जाता है।
स्कूली बच्चों की पढ़ाई ठप, मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बनी बड़ी चुनौती
नदी पार न कर पाने का सबसे बुरा असर छोटे-छोटे स्कूली बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। पानी के खौफ से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके अलावा यदि कोई ग्रामीण या बुजुर्ग अचानक बीमार पड़ जाए, तो उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना किसी जंग जीतने जैसा हो जाता है।
स्थानीय किसानों को भी अपने खेतों तक जाने और तैयार उपज को मुख्य बाजार तक ले जाने में भारी आर्थिक व शारीरिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से हर चुनाव में जनप्रतिनिधि आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही पुल की मांग फाइलों में दब जाती है।
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विधायक बोले- डीपीआर तैयार, जल्द शुरू होगा पुल का निर्माण कार्य
ग्रामीणों के लगातार उठ रहे आक्रोश के बीच स्थानीय विधायक प्रफुल्ल मांझी ने बताया कि जतहर गांव की इस गंभीर समस्या को लेकर वे संजीदा हैं। नदी पर पुल निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करा ली गई है और जल्द ही जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
हालांकि, विधायक की ओर से काम शुरू होने और पूरा होने की कोई स्पष्ट समयसीमा (Deadline) न दिए जाने से ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति है। ग्रामीणों का क