जमुई में राजस्व विभाग का बड़ा 'खेल': असली वारिसों को 'मार डाला', फर्जी नाती को सौंप दी पुश्तैनी जमीन
जमुई के झाझा अंचल में राजस्व विभाग की मिलीभगत से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां दो जीवित भाइयों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत और निःसंतान घोषित कर ...और पढ़ें

असली वारिसों को 'मार डाला', फर्जी नाती को सौंप दी पुश्तैनी जमीन
HighLights
दो जीवित भाइयों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किया गया।
फर्जी शपथ-पत्र के आधार पर 80 डिसमिल पुश्तैनी जमीन हड़पी गई।
पीड़ित परिवार ने न्याय और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
अरविंद कुमार सिंह, जमुई। राजस्व विभाग में गड़बड़ियों की खबरें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन झाझा अंचल कार्यालय से जुड़ा यह मामला सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही और मिलीभगत का ऐसा उदाहरण बनकर उभरा है, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड में दो जीवित भाइयों को मृत घोषित कर दिया गया।
इतना ही नहीं, उनके पूरे परिवार को निःसंतान दिखाकर पुश्तैनी 80 डिसमिल जमीन एक कथित नाती के नाम कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि बाराजोर (वर्तमान तेलियाडीह) निवासी गोवर्धन रविदास की वास्तविक पुत्री खगिया देवी को वंशावली से ही गायब कर दिया गया और उनकी जगह पारो देवी को गोवर्धन की पुत्री दर्शाया गया।
इसके बाद पारो देवी के पुत्र बताए गए सुखदेव रविदास ने स्वयं को गोवर्धन का नाती बताते हुए पूरी जमीन अपने नाम करा ली। करीब 16 वर्ष बाद भूमि अभिलेखों के अद्यतन के दौरान मामला सामने आया।
इसके बाद गोवर्धन रविदास के जीवित पुत्र टुकलाल दास और शोभन रविदास ने अपने जीवित होने के प्रमाण के साथ प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित परिवार ने तत्कालीन राजस्व कर्मचारी उग्र मोहन सिंह, अंचल निरीक्षक सुनील कुमार चौधरी तथा अंचल अधिकारी अवधेश कुमार नेपाली की भूमिका की जांच कर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। हालांकि, संबंधित अधिकारी और कर्मचारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
शपथ-पत्र के सहारे बदल दी गई पूरी वंशावली
मामला झाझा अंचल के बाराजोर मौजा स्थित जमाबंदी सं. 2050 से जुड़ा है। आरोप है कि छुछनरिया निवासी सुखदेव रविदास ने एक जून 2010 को नोटरी के समक्ष शपथ-पत्र देकर दावा किया कि वह गोवर्धन रविदास का नाती है।
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उसने यह भी कहा कि गोवर्धन के दोनों पुत्र टुकलाल दास और शोभन रविदास की मृत्यु हो चुकी है तथा उनकी कोई संतान नहीं है। साथ ही शपथ-पत्र में ही गोवर्धन की वास्तविक पुत्री खगिया देवी का नाम हटाकर पारो देवी को उनकी पुत्री दर्शाया गया और सुखदेव रविदास ने स्वयं को उनका पुत्र और उन्हें मृत बताते हुए करीब 80 डिसमिल जमीन अपने नाम दाखिल-खारिज करा लिया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि तत्कालीन राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक ने बिना समुचित जांच के प्रतिवेदन दे दिया, जिसके आधार पर दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। दोनों भाइयों के साथ बहन खागिया देवी आज भी जीवित हैं और झाझा अंचल के ही सुंदरीटांड़ में रह रही हैं।
आम सूचना निकली, खास सूचना नहीं
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उत्तराधिकार से जुड़े इतने संवेदनशील मामले में केवल आम सूचना जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि वास्तविक वारिसों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए खास सूचना जारी की जानी चाहिए थी। इतना ही नहीं, आम सूचना प्राप्त करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर भी संदिग्ध बताए जा रहे हैं।
19 दिनों में पूरी हो गई दाखिल-खारिज की प्रक्रिया
इस मामले में दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया जिस तेजी से पूरी हुई, वह भी सवालों के घेरे में है। आवेदन देने के मात्र 19 दिनों के भीतर जांच, सूचना और आदेश की पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
टाइमलाइन
- 1 जून 2010 : नोटरी के समक्ष शपथ-पत्र तैयार
- 11 जून 2010 : दाखिल-खारिज के लिए आवेदन
- 19 जून 2010 : राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक का प्रतिवेदन
- 19 जून 2010 : आम सूचना का प्रकाशन
- 30 जून 2010 : आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तिथि
- 30 जून 2010 : दाखिल-खारिज का आदेश
मामले को लेकर उठते सवाल
- अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किए गए जीवित भाइयों को उनका कानूनी हक वापस दिला पाएगा?
- क्या फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होगी?
फैक्ट फाइल
- मौजा : बाराजोर, झाझा अंचल
- जमाबंदी सं.: 2050
- खाता सं.: 269
- खेसरा सं.: 3323
- रकबा : 80 डिसमिल
- विवाद : फर्जी वंशावली के आधार पर दाखिल-खारिज
- पीड़ित : टुकलाल रविदास, शोभन रविदास व खगिया देवी (तीनों जीवित)