जमुई में नाबालिग को मांस खिलाकर 23 दिन तक दुष्कर्म, साढ़े तीन माह में कटिहार के आरोपियों को 37 पन्नों में मिली यह कठोर सजा
जमुई के अलीगंज से अपहृत 15 वर्षीय नाबालिग से कटिहार में 23 दिनों तक दुष्कर्म और प्रताड़ना के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्याय ...और पढ़ें

जमुई में 15 वर्षीय नाबालिग से 23 दिन तक दुष्कर्म, कटिहार के तीन आरोपियों को पोक्सो कोर्ट ने साढ़े तीन माह में सुनाई आजीवन कारावास की सजा
HighLights
तीन दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास।
नाबालिग से 23 दिन तक दुष्कर्म, गौमांस खिलाने का प्रयास।
स्पीडी ट्रायल से साढ़े तीन माह में मिला न्याय।
जागरण संवाददाता, जमुई। पाक्सो के विशेष न्यायालय के न्यायाधीश महेश्वर दूबे ने जमुई के अलीगंज से 15 वर्ष की एक नाबालिग को अपहरण कर कटिहार में 23 दिन तक लगातार दुष्कर्म और प्रताड़ना करने वाले तीन आरोपियों — मु. इमरान उर्फ चांद, मु. आफताब अंसारी और मु. सद्दाम — को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे न भरने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
पोक्सो कोर्ट का फैसला
विशेष न्यायाधीश महेश्वर दूबे ने दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद 37 पृष्ठ के फैसले में तीनों को दोषी ठहराया। सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने आरोपियों को मृत्युदंड की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार और सत्यजीत कुमार ने बहस की।
अलीगंज से अपहरण
एक दिसंबर 2025 को अलीगंज बाजार से गायब हुई 15 वर्षीय नाबालिग को 24 दिसंबर 2025 को जमुई पुलिस ने कटिहार के एक बंद कमरे से बरामद किया। उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति देखकर पुलिस और कोर्ट में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। पीड़िता ने बताया कि उसे मु. इमरान उर्फ चांद कटिहार ले गया, जहां मूर्छित अवस्था में उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया गया।
नाबालिग पर अत्याचार
पीड़िता के अनुसार, उसके साथ उसके दोस्त मु. सद्दाम को सौंपने तक दुष्कर्म जारी रहा। नाबालिग के कपड़े फाड़ दिए गए और उसे नए कपड़े पहनाकर हिन्दू पहचान मिटाने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही उसे प्रतिबंधित गौमांस खिलाया जाता था और विरोध करने पर पिटाई की जाती थी। यह जघन्य अपराध 23 दिन तक चलता रहा।
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मां को फोन काल ने बचाया
जब पीड़िता पूरी तरह निराश थी और परिवार भी हताश हो चुका था, तभी एक फोन काल ने उसकी जिंदगी बदल दी। सद्दाम ने ही पीड़िता के मोबाइल से उसकी मां को कॉल किया और कहा कि उसे खोजने की कोशिश न करें। इस एक कॉल ने नाबालिग के जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभाई।
पुलिस की तत्परता
जमुई पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीड़िता को कटिहार से बरामद किया। आरोपियों — इमरान आलम, आफताब अंसारी और सद्दाम हुसैन — को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
स्पीडी ट्रायल और साक्ष्य
डीएम और एसपी द्वारा पोक्सो न्यायालय से स्पीडी ट्रायल की मांग की गई, जिसे विशेष न्यायाधीश महेश्वर दूबे ने स्वीकार किया। 17 जनवरी 2026 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया, 22 जनवरी को न्यायालय ने संज्ञान लिया, और 27 जनवरी से गवाहों की सूची तैयार कर गवाही शुरू की गई।
पीड़िता, उसकी मां, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और स्कूल प्रधानाध्यापक की गवाही दर्ज की गई। 19 फरवरी से 28 फरवरी तक बहस सुनने के बाद 16 मार्च को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया। 24 मार्च 2026 को सजा सुनाई गई।
कानून और दंड
नए बीएनएस कानून के तहत, अपराधियों को अधिकतम मृत्युदंड और न्यूनतम 20 साल या अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा का प्रावधान है। विशेष न्यायालय ने इस गंभीर अपराध में तीनों को अंतिम सांस तक कारावास और जुर्माना सुनाया।
सतर्कता जरूरी
जमुई और कटिहार इलाके में यह घटना यह साबित करती है कि अपहरण और दुष्कर्म के लिए स्थानीय गिरोह सक्रिय हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों को सतर्क रहना आवश्यक है। पुलिस का सतर्क रहना और समय पर कार्रवाई बच्चों की जान बचा सकती है।
नाबालिग के जीवन में आशा
लगातार 23 दिन तक अत्याचार झेलने वाली पीड़िता की कहानी यह दर्शाती है कि कभी-कभी एक फोन कॉल ही किसी की जिंदगी बदल सकता है। पुलिस, न्यायपालिका और जागरूक नागरिकों की मदद से पीड़िता सुरक्षित हुई।
बच्चों की सुरक्षा करें
अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को हमेशा सुरक्षा और सतर्कता के महत्व के बारे में बताएं। समाज और प्रशासन की मदद से ही ऐसे जघन्य अपराधों को रोका जा सकता है।