जमुई: बारिश में बिलों से बाहर निकले सांप, डसने की घटनाएं बढ़ी; 6 लोगों ने गंवाई जान
जमुई में वर्षा ऋतु के आगमन के साथ सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे अब तक आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
बारिश से जमुई में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
सर्पदंश के कारण अब तक आधा दर्जन लोगों की जान गई।
अंधविश्वास से बचें, तुरंत सरकारी अस्पताल में उपचार कराएं।
संवाद सहयोगी, जमुई। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति का स्वरूप बदलने लगा है। रिमझिम बारिश से जहां मौसम सुहावना हो गया है, वहीं जलभराव और बिलों में पानी भरने के कारण सांप अपने प्राकृतिक ठिकानों से बाहर निकलने लगे हैं।
इसके साथ ही जिले में सर्पदंश की घटनाओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेत-खलिहानों, घरों के आसपास और जलजमाव वाले स्थानों पर सांप अधिक दिखाई दे रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। हाल के दिनों की बात करें तो अलग-अलग जगहों पर सर्पदंश से आधा दर्जन लोगों की जान भी जा चुकी है।
जानलेवा साबित हो सकती है लापरवाही
अमूमन बरसात के दिनों में सांप सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में घरों, गोहालों, लकड़ी या भूसे के ढेर तथा खेतों की ओर पहुंच जाते हैं। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों को खेतों में काम करते समय जूते पहनने, रात में टार्च का उपयोग करने तथा घर के आसपास साफ-सफाई रखने की जरूरत है।
झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में समय न गंवाएं
सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मनीष कुमार का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) उपलब्ध रहता है।
खबरें और भी
समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सावधानी बरतने और सर्पदंश की किसी भी घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील की है। बरसात के पूरे मौसम में सतर्कता ही सर्पदंश से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
अंधविश्वास ने लील ली जिंदगी
लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत घोरलाही गांव में सर्पदंश से 72 साल की तारा देवी की मौत हो गई। इस घटना में अंधविश्वास भारी पड़ गया। सांप काटने के बाद स्वजन तारा को उपचार कराने के बजाय झाड़-फूंक कराने ले गए।
इस दौरान हुई देरी के कारण तारा की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। जब तक स्वजन उसे उपचार के लिए सदर अस्पताल ले जाते तारा ने दम तोड़ दिया। इससे पहले भी झाड़-फूंक में समय जाया करने के कारण सोनो थाना क्षेत्र के पूर्वी मांझी टोला में मिट्ठू मांझी के सात वर्षीय पुत्र सूरज की मौत हो गई थी।
कब कब हुई सर्पदंश की घटनाएं
- 14 अप्रैल को खैरा थाना क्षेत्र के बल्लोपुर गांव में सर्पदंश से गोविंदा यादव की पुत्री अंशिका(18) की मौत हो गई।
- 19 अप्रैल को गरही थाना क्षेत्र के दरिमा गांव में सर्पदंश से गंगाधर यादव की पत्नी शोभा देवी ( 56)की मौत हो गई।
- 07 जून को सोनो थाना क्षेत्र के पूर्वी मांझी टोला में मिट्ठू मांझी के सात वर्षीय पुत्र सूरज की सर्पदंश से मौत।
- 15 जून को लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र के बेलाटांड गांव में सर्पदंश से अर्जुन यादव की पत्नी रीता देवी (50) की मौत हो गई।
- 19 जून को झाझा थाना क्षेत्र के करझोसवा गांव में सर्पदंश से सरस्वती देवी (22) की मौत हो गई ।
- 02 जुलाई को लक्ष्मीपुर प्रखंड के घोरलाही गांव में सर्पदंश से सिद्धेश्वर साह की पत्नी तारा देवी (72) की मौत हो गई।
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