जमुई में 17 साल से टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे, शिक्षा विभाग ने कभी नहीं ली सुध
जमुई के नवीन प्राथमिक विद्यालय, इस्लामनगर में 124 बच्चे 17 साल से जर्जर टीन शेड में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा का अधिकार कानून के बावजूद, स्कूल में ब् ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डॉ. विभूति भूषण, जमुई। कहने को तो शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) देश के हर बच्चे को बेहतर माहौल में पढ़ाई की गारंटी देता है, लेकिन जमुई नगर क्षेत्र के इस्लामनगर मोहल्ला स्थित नवीन प्राथमिक विद्यालय की हकीकत सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। यहां 124 बच्चों का भविष्य 2009 से ही करकट के एक जर्जर कमरे और शिक्षकों के झोले में कैद है।
सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि इस करकटनुमा कमरा वाले स्कूल का निर्माण विभाग द्वारा नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा जनसहयोग से किया गया है। विद्यालय की स्थिति इतनी हास्यास्पद और दयनीय है कि स्कूल की पूरी संपत्ति मोहल्ले के अलग-अलग घरों में बिखरी पड़ी है। विद्यालय का मुख्य रजिस्टर स्कूल में नहीं, बल्कि एक पूर्व रसोइया के घर सुरक्षित रखा जाता है।
बच्चों के खेलने का सामान एक बच्चे के घर में धूल फांक रहा है। विद्यालय को मिला वाद्य यंत्र नवीन प्राथमिक विद्यालय, नीमारंग मकतब के एक बक्से में कैद करके रखा हुआ है। विद्यालय के प्रधान शिक्षक हर सुबह कुछ जरूरी कागजात और रजिस्टर एक झोले में भरकर स्कूल लाते हैं और छुट्टी के बाद उसे सुरक्षित रखने के लिए अपने साथ ले जाते हैं।
मात्र 40 फीट लंबे और 15 फीट चौड़े करकट के एक छोटे से कमरे में 124 छात्र और चार शिक्षक बैठने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के नाम पर यहां न तो ब्लैकबोर्ड, ना शौचालय है, न अलमीरा और न ही एक भी पंखा है।
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मौसम की मार पड़ते ही बंद हो जाती है पढ़ाई
बच्चे बताते हैं कि बहुत अधिक गर्मी या बहुत अधिक ठंड पड़ने पर शिक्षकों को मजबूरी में विद्यालय बंद कर देना पड़ता है, जिससे पढ़ाई बाधित हो जाती है, क्योंकि विद्यालय चारों ओर से खुला हुआ है। मानसून आते ही छत से पानी टपकने लगता है, जिससे स्कूल बंद करना एकमात्र विकल्प बचता है।
हल्की सी हवा चलने पर भी करकट की छत उड़ने का डर बना रहता है, जिससे मासूमों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। कई बार तो आंधी आने पर विद्यालय का करकट ढीला हो जाता है और उसे तुरंत ही मरम्मत कराना पड़ता है, वरना कोई भी हादसा हो सकता है।
आश्चर्य की बात यह है कि विद्यालय के पास भवन निर्माण के लिए 34 डिसमिल जमीन उपलब्ध है, लेकिन 17 साल बीत जाने के बाद भी अंचल कार्यालय से एनओसी नहीं मिलने के कारण ईंट की एक दीवार तक नहीं खड़ी हो सकी है।
विभाग की इस सुस्ती और प्रशासनिक उदासीनता के कारण विद्यालय आज भी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जमुई के ये मासूम बच्चे सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा भुगतेंगे? क्या शिक्षा विभाग की नींद तब खुलेगी जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?
अंचल कार्यालय को अविलंब विद्यालय के भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। जमीन मिलने के साथ ही विद्यालय के भवन का निर्माण कर दिया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से प्रयास जारी है।
दयाशंकर, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जमुई