उत्तरी अमेरिका से पहली बार जमुई पहुंचा दुर्लभ श्वेतमाथा हंस, तय किया 13 हजार KM का सफर
जमुई में पहली बार उत्तरी अमेरिका से दुर्लभ श्वेतमाथा हंस देखा गया है। जिला वन पदाधिकारी के अनुसार, नागी पक्षी आश्रयणी में इसका दिखना सुखद आश्चर्य है। ...और पढ़ें

उत्तरी अमेरिका से पहली बार जमुई पहुंचा दुर्लभ श्वेतमाथा हंस। जागरण
HighLights
जमुई में पहली बार दुर्लभ श्वेतमाथा हंस का आगमन।
उत्तरी अमेरिका से 13 हजार किमी की दूरी तय कर पहुंचा।
वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 2024 के तहत संरक्षित पक्षी।
डॉ. विभूति भूषण, जमुई। जिले की जलवायु कहीं ना कहीं प्रवासी पक्षियों के लिए बहुत ही अनुकूल हो चुकी है। या यूं कहें कि प्रवासी पक्षियों को यहां की जलवायु बहुत ही भाने लगी है। जिसके कारण सर्दियों के मौसम में उनका यहां पहुंचना अनवरत रूप से जारी है। इस श्रृंखला में कई ऐसे पक्षी भी शामिल हैं जिनका पहली बार जमुई आगमन हुआ है।
जिला वन पदाधिकारी ने बताया कि नागी पक्षी आश्रयणी में पहली बार अचानक से ग्रेटर व्हाइट फ्रंटेड गूज यानी श्वेतमाथा हंस का दिखना किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं है। यह पक्षी आम तौर पर सर्दियों में उत्तरी अमेरिका, यूरोप और दक्षिण एशिया में प्रवास करता है।
इसके अलावा यह उतरी कनाडा, अलास्का,ग्रीनलैंड और रूस में रहकर प्रजनन करता है। यह अमेरिका के मिसिसिपी में पाया जाता है। यह बहुत ही दुर्लभ पक्षी है और वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 2024 के तहत इसे भारत सरकार ने दुर्लभ पक्षी की श्रेणी में रखा है।
यह अमेरिका और उसके आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड पड़ने के कारण उत्तरी अमेरिका से चलकर और तेरह हजार की दूरी तय करके जमुई पहुंचा है। यह पक्षी झील, घास के मैदान आदि क्षेत्रों में रहना पसंद करता है। यह हंस की प्रजाति का पक्षी है और जमीन पर घूम घूम कर अपने भोजन की तलाश करता है।
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पानी में डुबकी लगाकर अथवा पानी के ऊपर चलकर भोजन करता है। यह भूरे रंग का होता है और इसका पैर और सोच नारंगी रंग का होता है। पेट पर काला धब्बा और नमक मिर्च का दाग होता है।नागी पक्षी आश्रयणी और उसके आसपास के क्षेत्र में पक्षियों के सुरक्षा और प्रवास को लेकर समुचित प्रबंध किया गया है।यह उसका ही प्रतिफल है।
हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि इस तरह का माहौल तैयार किया जाए कि अधिक से अधिक प्रवासी पक्षी यहां पहुंच कर लंबे समय तक प्रवास करें। इसके पूर्व भी वर्ष 2023 में चीन से काला सिंखुर और वर्ष 2025 में हिमालय ग्रीफन का पहली बार आगमन जमुई में आगमन हो चुका है।
प्रवासी पक्षियों के प्रवास सुरक्षा और भोजन को लेकर समुचित प्रबंध किया गया है। साथ ही इनका एक बेहतर माहौल देने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि इनकी संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो सके। - तेजस जायसवाल, जिला वन पदाधिकारी, जमुई