मिथिलांचल एक्सप्रेस में गूंजी किलकारी: 'देवदूत' बनी RPF और मेडिकल टीम, जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित
चलती मिथिलांचल एक्सप्रेस में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद झाझा स्टेशन पर आरपीएफ और मेडिकल टीम ने मां-नवजात को बचाया। रेल मदद की सूचन ...और पढ़ें

मिथिलांचल एक्सप्रेस में गूंजी किलकारी: 'देवदूत' बनी RPF और मेडिकल टीम, जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित
HighLights
चलती मिथिलांचल एक्सप्रेस में महिला को प्रसव पीड़ा।
झाझा स्टेशन पर आरपीएफ और मेडिकल टीम की तत्परता।
मां और नवजात दोनों सुरक्षित, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती।
संवाद सूत्र, बोड़वा (जमुई)। चलती ट्रेन की धड़कनों के बीच जब एक बेबस मां की चीखें गूंजीं तो सफर कर रहे सहयात्रियों के दिल दहल गए, लेकिन रेल मदद की एक पुकार और झाझा स्टेशन पर तैनात आरपीएफ व डॉक्टर की देवदूत जैसी तत्परता ने एक मासूम को सुरक्षित दुनिया में ला दिया।
गाड़ी सं. 13155 मिथिलांचल एक्सप्रेस में जीवन और मौत के बीच झूलती ममता को न केवल नया जीवन मिला, बल्कि रेलवे प्रशासन की संवेदनशीलता ने मानवता की एक नई मिसाल पेश की।
कोलकाता से समस्तीपुर जा रही 21 वर्षीय गर्भवती सफीना खातून को चलती ट्रेन में अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। भाई मु. सोहेल की बेबसी और सफीना की कराह ने कोच में चीख-पुकार का माहौल बना दिया। इसी बीच रेल मदद के जरिये झाझा स्टेशन को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही आरपीएफ इंस्पेक्टर आरआर सहाय और रेलवे की चिकित्सकीय टीम पलक झपकते ही प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद हो गई। जैसे ही ट्रेन झाझा स्टेशन पर रुकी तो चिकित्सक ने कोच में ही मोर्चा संभाला। तब तक महिला बच्चे को जन्म दे चुकी थी।
चिकित्सक ने तुरंत मां और नवजात का प्राथमिक उपचार कर उनकी सांसों को थाम लिया। जब डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को सुरक्षित बताया, तब जाकर सहयात्रियों और आरपीएफ के जवानों ने राहत की सांस ली।
आरपीएफ जवानों ने बेहद संवेदनशीलता के साथ मां और नवजात को ट्रेन से सुरक्षित उतारा और अपनी गोद में उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। वहां से उन्हें आगे के इलाज के लिए झाझा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि सही समय पर मिली सूचना और टीम की तत्परता से आज एक मां की गोद सूनी होने से बच गई और जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।