कैमूर: 4 माह में ही धंस गई नेशनल हाइवे सड़क, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग
मोहनियां-चौसा पथ पर स्थित नेशनल हाइवे-319 ए का एक हिस्सा चार माह में ही धंस गया है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य ...और पढ़ें

कैमूर में धंस गई नेशनल हाइवे-319 ए। फोटो जागरण
HighLights
मोहनियां-चौसा पथ पर एनएच-319 ए का हिस्सा धंसा।
चार माह पहले बनी सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल।
ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत और जांच की मांग की।
संवाद सूत्र, रामगढ़। मोहनियां–चौसा पथ पर दैतरा बाबा बीर से कुछ ही दूरी दक्षिण स्थित नेशनल हाइवे-319 ए का एक हिस्सा धंस जाने से राहगीरों में दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।
सड़क पर बने दस मीटर की लंबाई में फटी सड़क के गड्ढे को देखकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जिस सड़क का निर्माण मात्र चार माह पहले हुआ था, उसका इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों ने इस मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
लोगों के अनुसार, सड़क के बीच हिस्से में अचानक दरार व दबने से गड्ढा बन गया है। इससे सड़क पर चलने वाले छोटे-बड़े सभी वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह मार्ग मोहनिया और चौसा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण नेशनल हाइवे है, जिस पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ट्रक, बस, कार, एंबुलेंस, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का धंस जाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रात के समय या तेज वर्षा के दौरान कोई वाहन चालक इस धंसे हुए हिस्से को नहीं देख पाया तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थान अत्यंत खतरनाक बन गया है।
बरसात के मौसम में गड्ढे में पानी भर जाने से इसकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाएगा, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाएगा।
निर्णाण कंपनी की जांच की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क का निर्माण कोलकाता की सड़क निर्माण कंपनी सीपटेक द्वारा कराया गया था। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
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उनका कहना है कि यदि सड़क निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया गया होता और तकनीकी मानकों का सही तरीके से पालन हुआ होता तो इतनी जल्दी सड़क नहीं धंसती। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का मात्र चार माह में क्षतिग्रस्त होना लोगों के लिए चिंता और आश्चर्य का विषय बना हुआ है।
लोगों ने यह भी कहा कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी करने वाले संबंधित विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया।
लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित जांच होती और मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने नेशनल हाइवे के धंसी सड़क का मरम्मत करने की विभाग से मांग की है। धंसे हुए हिस्से की तत्काल मरम्मत कराई जाए और वहां चेतावनी संकेतक की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। उनका कहना है कि सड़क की मरम्मत में देरी लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
जनता ने सड़क की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर सड़कें बनाने का दावा करती है, लेकिन यदि कुछ ही महीनों में सड़कें धंसने लगें तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। लोगों ने मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए, निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए
फिलहाल सड़क पर बने दरार व धंसने के कारण वाहन चालक सावधानीपूर्वक आवागमन कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों को आशंका है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसी भी समय बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।
लोगों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर सड़क की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।