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'जल्द आने की कह कर गया था, अपना वादा तोड़ दिया', सड़क दुर्घटना में बेटे-बहू की मौत के बाद चीख उठी बुजुर्ग मां

Published: Fri, 04 Sep 2026 11:51 AM (IST)

बलरामपुर के गोसाईपुर गांव के नसीम हैदर और उनकी पत्नी अशरफा प्रवीण की पूर्णिया में सड़क दुर्घटना में मौत हो ...और पढ़ें

शोकाकुल स्वजन व ढांढस बंधाने पहुंचे लोग। जागरण

शोकाकुल स्वजन व ढांढस बंधाने पहुंचे लोग। जागरण 

HighLights

  1. बलरामपुर के दंपति की पूर्णिया में सड़क दुर्घटना में मौत।

  2. 16 वर्षीय बेटा अनाथ, बुजुर्ग माता-पिता का सहारा टूटा।

  3. परिवार पर आर्थिक संकट, मुआवजे की मांग की गई।

संवाद सूत्र, बलरामपुर(कटिहार)। सुगर की रुटीन चेकअप करवा कर जल्द लौट आएंगे अब्बा-अम्मी...बेटा अदनान घर का ख्याल रखना। पर यह जल्द कभी खत्म नहीं होने वाली इंतजार में बदल गई।

बलरामपुर प्रखंड के शरीफनगर पंचायत अंतर्गत गोसाईपुर गांव निवासी दंपति नसीम हैदर उर्फ मिस्टर (45) और पत्नी अशरफा प्रवीण (30) की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।

पूर्णिया जिले के बायसी-दालकोला एनएच-31 पर डंगराहा चेक पोस्ट के समीप बुधवार की रात ट्रक ने रौंध दिया। घटनास्थल पर दोनों की मौत हो गई।

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घटना की सूचना पहुंचते पूरे गांव में मातम पसरा गया। स्वजन में कोहराम मच गया। गुरुवार की सुबह दोनों शव गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। पिता की जुबान ने खामोशी की चादर तान ली तो मां बार-बार अचेत हो रही थी।

सड़क दुर्घटना ने 85 वर्षीय पिता मो शहाबुद्दीन और 70 वर्षीय माता सबेरा खातून की बुढ़ापे की लाठी तोड़ दी। साथ ही 16 वर्षीय किशोर पुत्र अदनान हैदर के कच्चे कंधों को जिम्मेदारी के भार से भर दिया।

माता-पिता की मौत की खबर सुनकर किशोर बेटे की हालत बेहद खराब हो गई। अचानक माता-पिता का साया उठ जाने से वह सदमे में है।

घर में दिखा रुला देने वाला माहौल

ग्रामीणों के अनुसार, नसीम हैदर अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है। नसीम हैदर तीन भाइयों में एक थे। मेहनत-मजदूरी एवं अपने काम के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण करते थे।

मां सबेरा खातून के मुंह से बार-बार निकल रहा था कि जल्द आने की कह कर गया था। उसने अपना वादा तोड़ दिया। मां की तड़प देख ढांढस बंधाने वाले खुद विहृल हो जा रहे थे।

पिता मो शहाबुद्दीन की चुप्पी सभी को खल रही थी, लेकिन कोई उनसे बात करने हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उनकी चुप्पी टूटती तो बस इतना बात कहते कि उपर वाले ने बुढापे में कैसा दिन दिखा दिया।

मुआवजे की मांग

गुरुवार को गांव में शव पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर तरफ शोक और मातम का माहौल बना रहा। मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार दोनों का अंतिम संस्कार कर दफन किया गया।

इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं रिश्तेदार मौजूद रहे। घटना को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

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