विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कटिहार: गंगा के गर्भ में समाया 8 KM शंकर तटबंध, 2 दशक से खामियाजा भुगत रही बड़ी आबादी

Published: Tue, 30 Jun 2026 01:36 PM (IST)

कटिहार के अमदाबाद में शंकर तटबंध का 8 किमी से अधिक हिस्सा गंगा नदी में समा गया है, जिससे दो ...और पढ़ें

गंगा के गर्भ में समाया 8 KM शंकर तटबंध, 2 दशक से खामियाजा भुगत रही बड़ी आबादी

गंगा के गर्भ में समाया 8 KM शंकर तटबंध, 2 दशक से खामियाजा भुगत रही बड़ी आबादी

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

मनीष कुमार सिंह, अमदाबाद (कटिहार)। प्रखंड अंतर्गत शंकर तटबंध करीब आठ किमी से अधिक लंबाई पूर्व में कटाव की भेंट चढ़ चुका है। इस कारण गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर गोलाघाट से लेकर झब्बू टोला इत्यादि गांवों के समीप से ग्रामीण क्षेत्र की ओर पानी प्रवेश करने लगता है।

प्रत्येक वर्ष प्रखंड में बाढ़ से भारी तबाही मचती है। जान माल की क्षति के साथ करीब चार माह तक लोग बाढ़ की परेशानी को झेलते हैं। बावजूद इसके निजात को लेकर व्यवस्था अब तक गंभीर नहीं हुई है। बताया जाता है कि गंगा नदी के पानी को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश से रोकने के लिए शंकर तटबंध निर्मित था।

दो दशक से अधिक समय से गोलाघाट से लेकर झब्बू टोला, सूबेदार टोला, कृति टोला होते हुए बाबला बन्ना तक शंकर तटबंध गंगा नदी के कटाव की भेंट चढ़ चुका है।

ग्रामीण मनोहर सिंह, छोटेलाल सिंह, अशोक सिंह आदि ने बताया कि शंकर बांध जबसे गंगा के कटाव की चपेट में आया है तब से बाढ़ की समस्या बढ़ गई है। गंगा का पानी प्रवेश करने के कारण फसल नुकसान के साथ बाढ़ के बीच सुरक्षित रहने की चुनौती भी बनी रहती है।

चार माह तक बनी रहती है बाढ़ की समस्या:

शंकर तटबंध के गंगा नदी में कट जाने का खामियाजा बड़ी आबादी को उठानी पड़ रही है। बाढ़ आने से पार दियारा, दक्षिणी करमुल्लापुर, दुर्गापुर, भवानीपुर खट्टी, चौकिया पहाड़पुर, उत्तरी करीमुल्लापुर, किशनपुर एवं नगर पंचायत अमदाबाद के कई गांव सहित अन्य पंचायत के दर्जनों गांव के लोगों के समक्ष काफी कठिनाई उत्पन्न हो जाती है।

पशु चारा से लेकर आवागमन की समस्या से लोग जूझने लगते हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना काफी मुश्किल हो जाता है एवं गर्भवती महिलाओं व मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में भी स्वजन को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

नाव ही बनता है सहारा:

प्रखंड क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष आने वाली बाढ़ के दौरान नाव ही आवागमन का सहारा बनता है। एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए, पशु चारा लाने के लिए एवं प्रखंड मुख्यालय सहित अस्पताल तक आने के लिए भी लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।

कुल मिलाकर शंकर तटबंध का बड़ा हिस्सा गंगा के कटाव में विलीन होने का खामियाजा बड़ी आबादी भुगतने को विवश है।

शंकर तटबंध करीब आठ किमी पूर्व में कटाव की चपेट में आ चुका है। तटबंध रहने से जहां लोगों को बाढ़ से सुरक्षा मिलती है वहीं कहीं स्पर या भूमि कटाव उत्पन्न होने पर तटबंध रहने पर कटारोधी कार्य चलाने के लिए आसानी से पहुंच बनती है। रामायण पुर से चौकिया पहाड़पुर बंगाल सीमा तक तटबंध निर्माण को लेकर पूर्व में एलाइनमेंट हुआ था लेकिन एलाइनमेंट के बाद नदी के कटाव में एलाइनमेंट वाला एरिया भी कट चुका है। - विश्व वल्लभ, कनीय अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल कटिहार

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।