नेपाल-बांग्लादेश के किचन में कटिहार की तीखी मिर्च का तड़का, किसान ₹2 लाख तक की कर रहे कमाई
कटिहार के फलका प्रखंड में हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। यहां की मिर्च नेपाल, बांग्लादेश समे ...और पढ़ें

कटिहार की मिर्च का तड़का
HighLights
फलका की हरी मिर्च से किसानों की आय बढ़ी।
नेपाल, बांग्लादेश सहित कई राज्यों में मिर्च का निर्यात।
प्रति एकड़ 2 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत संभव।
एडी खुशबू, पोठिया (कटिहार)। फलका प्रखंड की तीखी हरी मिर्च इन दिनों किसानों की जिंदगी में शहद जैसी मिठास घोल रही है। कभी मखाना, केला और मक्का की खेती के लिए पहचान रखने वाला यह इलाका अब नकदी फसल के रूप में हरी मिर्च उत्पादन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है।
पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश व नेपाल के किचन में यहां का मिर्च का तड़का लगता है। इसके अलावा इस क्षेत्र के उत्पादित मिर्च अपने सूबे समेत पड़ोसी सूबे झारखंड व कोलकाता व असम आदि जगहों में निर्यात हुआ करता है। जिस कारण मिर्च का भाव बहुत ही मुनासिब है और किसानों के जीवन में खुशहाली का रंग भरने लगा है।
इसका परिणाम यह है कि वर्तमान में प्रखंड के करीब 165 हेक्टेयर क्षेत्र में मिर्च की खेती हो रही है। फलका में उत्पादित हरी मिर्च की मांग सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। यहां की मिर्च झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और देश के अन्य राज्यों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल व बांग्लादेश तक भेजी जा रही है।

(मिर्च खेत का फोटो व खेती मिर्च तोड़ने के बाद खेत में मिर्च का ढेर)
कृषक प्रदीप प्रभा, अशोक मंडल, बबलू, खालिद, इम्तियाज, संजय कुमार, अखिलेश, निरंजन, रंजीत मंडल, दिनेश मंडल, मो. अब्बू, आशिफ इकबाल, मो. इरसाद आदि का कहना है कि वर्तमान में मिर्च का थोक भाव 4500 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से उन्हें बेहतर आमदनी हो रही है।
खबरें और भी
महेशपुर के किसान आशिफ इकबाल ने बताया कि एक एकड़ में अच्छी खेती होने पर पांच से छह टन तक मिर्च का उत्पादन हो जाता है। एक बार की खेती में लागत निकालने के बाद डेढ़ से दो लाख रुपये तक की शुद्ध बचत संभव है।
किसान इंद्रदेव मंडल ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने एक एकड़ में मिर्च की खेती की है। करीब 50 से 60 हजार रुपये की लागत लगी, जबकि अब तक डेढ़ लाख रुपये से अधिक की मिर्च बेच चुके हैं। मिर्च की खेती ने ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
-1784199678780.jpg)
(मिर्च की खेती)
बड़ी संख्या में महिलाएं और मजदूर मिर्च तोड़ने के कार्य से जुड़े हैं।किसानों के अनुसार तुड़ाई का भुगतान लगभग 800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किया जाता है, जिससे स्थानीय मजदूरों को नियमित रोजगार मिल रहा है।
किसान बुद्धदेव मंडल, ओम प्रकाश कुमार, रजनीश कुमार और आदित्य ने बताया कि फलका की मिर्च अपनी गुणवत्ता और तीखेपन के कारण बाजार में अलग पहचान बना चुकी है। यही वजह है कि हर साल इसकी मांग बढ़ रही है और किसानों की आय भी दोगुनी होने लगी है।
क्या कहते हैं कृषि पदाधिकारी
प्रखंड कृषि पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बताया कि परंपरागत खेती के साथ किसान सहफसली खेती के रूप में मिर्च उत्पादन को तेजी से अपना रहे हैं। विभाग किसानों को उन्नत तकनीक से मिर्च की खेती का प्रशिक्षण भी देगा, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके। फलका में हरी मिर्च की बढ़ती खेती अब किसानों की आर्थिक समृद्धि की नई मिसाल बनती जा रही है।