खेतों में तैयार मखाना पर भाव में भारी गिरावट; MSP की बाट जोह रहे कटिहार के किसान
कटिहार के बरारी में मखाना की कीमतों में अचानक भारी गिरावट से उत्पादक किसान परेशान हैं। उन्हें लागत निकालना भी ...और पढ़ें

खेतों में तैयार मखाना पर भाव में भारी गिरावट; एमएसपी की बाट जोह रहे कटिहार के किसान
HighLights
मखाना की कीमतों में भारी गिरावट से किसान परेशान।
लागत निकालना भी हुआ मुश्किल, कर्ज चुकाने की चिंता।
सरकारी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग।
संवाद सूत्र, बरारी (कटिहार)। अचानक मखाना की कीमत में आई भारी गिरावट से उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खेतों में तैयार मखाना के फल (गुड़िया) का बाजार भाव पिछले एक सप्ताह में काफी नीचे आ गया है। पिछले साल से आधी हो गई है।
किसानों के अनुसार, व्यापारी काफी मोलभाव के बाद करीब 60 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से तैयार फलन खरीदने की बात कर रहे हैं। करीब 50 से 60 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से खेत लीज पर लेकर मखाना की खेती की है।
पौधों की रोपाई, खाद, सिंचाई और अन्य रखरखाव पर प्रति बीघा करीब 30 से 35 हजार रुपये खर्च आता हैं। इससे लीज की रकम चुकाने के साथ महाजनों से लिए कर्ज की चिंता भी बढ़ गई है।
किसानों ने कहा कि सरकारी स्तर पर मखाना बोर्ड की स्थापना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है। सरकारी खरीद व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने को विवश हैं।
किसान किशोर भारती, इंद्रदेव महतो, अनिल यादव व बाबूलाल मरांडी ने बताया कि कड़ी धूप, गर्मी और बारिश की परवाह किए बिना मखाना की खेती की गई। अब जब फल पककर तैयार हुआ है तो बाजार भाव में अचानक गिरावट आ गई है। स्थिति यह है कि खेतों तक व्यापारियों के पहुंचने में भी कमी आई है।
पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम भाव
किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष इसी समय मखाना की बाजार स्थिति बेहतर थी। खेतों में लगे गुड़िया का भाव करीब 31 से 32 हजार रुपये प्रति क्विंटल था और प्रति बीघा फलन की बिक्री करीब 1.25 से 1.30 लाख रुपये तक हुई थी।
इस वर्ष गुड़िया का भाव घटकर करीब 14 से 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। वहीं व्यापारी प्रति बीघा फलन के लिए महज करीब 60 हजार रुपये कीमत लगा रहे हैं।
दस हजार हेक्टेयर से अधिक में होती है खेती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बरारी प्रखंड में करीब एक हजार हेक्टेयर और कटिहार जिले में दस हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मखाना की खेती होती है। बड़ी संख्या में किसान इस फसल पर निर्भर हैं।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार मखाना की सरकारी खरीद शुरू कर न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित देते तो उन्हें बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से राहत मिल सकती है।
वर्तमान स्थिति में लागत निकालना तो दूर, मखाना किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इससे किसान हलकान और परेशान हैं।
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