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    बिहार का 'ड्रीम प्रोजेक्ट': 24 घंटे चल रहा अगुवानी-अजगैवीनाथ फोरलेन ब्रिज का काम, नॉर्थ-साउथ होंगे कनेक्ट

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 04:22 PM (IST)

    अगुवानी और अजगैवीनाथ धाम के बीच गंगा नदी पर बन रहे फोरलेन पुल का काम अब युद्धस्तर पर जारी है, जिसका लक्ष्य दिसंबर 2027 तक पूरा करना है। ...और पढ़ें

    24 घंटे चल रहा अगुवानी-अजगैवीनाथ फोरलेन ब्रिज का काम (जागरण)

    24 घंटे चल रहा अगुवानी-अजगैवीनाथ फोरलेन ब्रिज का काम (जागरण)

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    संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया)। अगुवानी और अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) के बीच गंगा नदी पर निर्माणाधीन फोरलेन पुल का काम अब युद्धस्तर पर चल रहा है। मालूम हो कि बार-बार इस पुल के निर्माण कार्य पर ब्रेक लगा है। कभी हादसे, कभी गंगा की बाढ़, तो कभी कोरोना काल इस पुल पर काली छाया बनकर पड़ी है, लेकिन अब युद्धस्तर पर कार्य चल रहा है।

    निर्माण एजेंसी (एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन) के अनुसार, दिसंबर 2027 की नई तय समय सीमा तक इस पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। गंगा की मुख्य धारा में पिलर और तीन अलग-अलग स्थानों पर वैल कैप का निर्माण भारी मशीनों व अत्याधुनिक तकनीक से किया जा रहा है।

    यह बिहार सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन सुगम होगा तथा व्यापार व पर्यटन को गति मिलेगी।

    परियोजना को अब निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। निर्माण एजेंसी द्वारा गंगा नदी के बीच क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, नए पाए के निर्माण तथा तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कराया जा रहा है।

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    गंगा घाट पर भारी मशीनों की आवाज, विशाल क्रेनों की लगातार आवाजाही, वेल्डिंग, कटिंग और कंक्रीट ढलाई का काम 24 घंटे जारी है। परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों की टीम लगातार निर्माण कार्य को गति देने में जुटी हुई है। गंगा की मुख्य धारा में तीन अलग-अलग स्थानों पर वैल कैप निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

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    निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजय कुमार का कहना है कि बाढ़ से पहले नदी की मुख्य धारा में हो रहे कार्यों का तीन हिस्सा पूरा कर लेंगे। शेष बचे एक हिस्से का कार्य बाढ़ के समय भी जारी रहेगा। बाढ़ में कार्य नहीं रुकेगा।

    उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बनेगा मजबूत संपर्क

    अगुवानी-अजगैवीनाथ धाम पुल के निर्माण से बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच आवागमन में ऐतिहासिक बदलाव आने की उम्मीद है। पुल चालू होने के बाद लोगों को एक नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।

    खगड़िया समेत कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों को अजगैवीनाथ धाम, भागलपुर और वैद्यनाथधाम जाने में आसानी होगी। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह पुल केवल सड़क संपर्क का साधन नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच विकास का मजबूत सेतु साबित होगा।

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    बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना

    इस परियोजना की लागत का आरंभिक मूल्यांकन 1710.77 करोड़ किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 23 फरवरी 2014 को परबत्ता स्थित केएमडी कॉलेज मैदान में इसका शिलान्यास किया था।

    नौ मार्च 2015 को उन्होंने मुरारका कॉलेज, अजगैवीनाथ धाम के मैदान से पुल निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। बीच-बीच में किसी न किसी कारण से निर्माण कार्य पर ब्रेक लगा। एक बार फिर छह जून 2025 से निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

    निर्माण के दौरान हादसा

    मालूम हो कि चार जून 2023 की संध्या अगुवानी-अजगैवीनाथ धाम महासेतु के अगुवानी साइट से पिलर संख्या 10, 11 व 12 एकाएक ध्वस्त हो गया। पिलर संख्या नौ को भी क्षति पहुंची थी। 170 सेगमेंट और गंगा में 14 हजार टन मलबा गिरा था। इस दौरान एक कर्मी की मौत भी हुई थी। इसके बाद पुल निर्माण कार्य को बंद कर दिया गया।

    लंबी जांच-प्रक्रिया चली। तब जाकर पुन: छह जून 2025 से कार्यारंभ हुआ है। मालूम हो कि इससे पूर्व भी अजगैवीनाथ धाम की ओर से एक बार हादसे घटित हुई थी। 30 अप्रैल 2022 को पिलर संख्या-चार और पांच के बीच का स्ट्रक्चर अजगैवीनाथ धाम की ओर से गिर गया था। जिसमें एक इंजीनियर की मौत हुई थी।

    मार्च 2020 में ही निर्माण कार्य पूरा करना था, अब दिसंबर 2027 में कार्य पूर्ण करने का दावा

    बताते चलें कि शिलान्यास के समय विभागीय निर्देश मार्च 2020 तक इस महासेतु पर आवागमन शुरू करने का था, लेकिन 2019 की बाढ़ ने बाधा पहुंचाई। जिसके उपरांत विभाग ने 2021 तक महासेतु पर आवागमन चालू करने का लक्ष्य रखा, फिर कोरोना के कारण लाक डाउन में कार्य बहुत हद तक बाधित रहा। तब 2022 का लक्ष्य रखा गया, लेकिन गंगा की बाढ़ आदि के कारण बाधा आई।

    इधर, वरीय परियोजना अभियंता, विशेष कार्य प्रमंडल- दो, अजगैवीनाथ धाम-अगुवानी घाट पुल, खगड़िया, शशि भूषण सिंह ने दावा किया है कि गंगा की बाढ़ को भी झेलते हुए कार्य करना है। समय पर कार्य पूर्ण होगा।