खगड़िया में बाढ़ हुई विकराल: उफान पर गंगा और बूढ़ी गंडक, खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर बह रही नदियां
गंगा और बूढ़ी गंडक सहित कोसी व बागमती नदियां खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है।

बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त। (जागरण)
HighLights
गंगा और बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से ऊपर।
खगड़िया के चार प्रखंडों की 23 पंचायतें बाढ़ प्रभावित।
लोग पलायन कर रहे, राहत शिविर और नावें संचालित।
जागरण संवाददाता, खगड़िया। कोसी, बागमती, गंगा और बूढ़ी गंडक उफान पर है। सभी नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है।
गंगा और बूढ़ी गंडक विकराल रूप धारण कर चुकी है। मालूम हो कि खगड़िया जिले के चार प्रखंडों से होकर गंगा और बूढ़ी गंडक गुजरती है।
इनमें खगड़िया सदर, मानसी, गोगरी और परबत्ता शामिल है। इन चार प्रखंडों के कुल 23 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। खगड़िया नगर परिषद, मानसी नगर पंचायत और गोगरी नगर परिषद का भी थोड़ा-बहुत इलाका बाढ़ की चपेट में है।
सबसे बड़ी बात यह है कि गंगा और बूढ़ी गंडक जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उससे बाढ़ प्रवण क्षेत्र में परेशानी बढ़ गई। बाढ़ क्षेत्र का विस्तार होता जा रहा है।
प्रभावित क्षेत्र में स्थिति दिनोंदिन विकट होती जा रही है। लोग पलायन करने लगे हैं। बांध-तटबंधों और ऊंचे स्थलों पर पलायन कर जा रहे हैं।
मालूम हो कि खगड़िया के खारा धार जलद्वार के पास सोमवार की सुबह छह बजे गंगा खतरे के निशान से दो मीटर 16 सेंटीमीटर ऊपर थी।
जबकि खगड़िया एनएच-31 ब्रिज, अघोरी स्थान के पास बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से एक मीटर 78 सेंटीमीटर ऊपर थी। दोनों की प्रवृति फिलहाल बढ़ने की बताई गई है। कहने का मतलब अभी गंगा और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि जारी रहेगी।
बूढ़ी गंडक की बाढ़ से स्थिति विकराल
इधर बूढ़ी गंडक की बाढ़ से गोगरी प्रखंड के बोरना पंचायत में स्थिति विकराल होती जा रही है। यहां के मुखिया प्रतिनिधि मु. नासिर इकबाल ने बताया कि सभी 11 वार्ड बाढ़ की चपेट में है। लगभग एक हजार घरों में बाढ़ का पानी है।
तीन सौ के आसपास लोग जीएन तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। 11 नावें चल रही है। तीन सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है।
परबत्ता प्रखंड का भरसो पंचायत पूर्ण रूपेण बाढ़ की चपेट में है। कई घरों में बाढ़ का पानी है। लोग रतजगा करने को विवश हैं। यहां से लोगों ने पलायन करना भी शुरू कर दिया है।
हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर सामुदायिक रसोई की शुरुआत की गई है। नावें चलाई जा रही हैं। इसकी जानकारी स्थानीय मुखिया ने दी है।
दूसरी ओर वार्ड संख्या- आठ के रतन कुमार सिंह, रामप्रवेश सिंह, संतोष साह, पप्पू सिंह, महेश सिंह, पीयूष कुमार ने बताया कि हमलोगों के घर से आठ सौ मीटर की दूरी पर वार्ड संख्या-नौ में सामुदायिक रसोई का संचालन हो रहा है। बाढ़ का पानी पारकर जाना पड़ता है। दुर्घटना घट सकती है।
यहां के वार्ड सदस्य संतोष साह ने कहा कि, हमारे वार्ड में भी शिविर चलना चाहिए। उन्होंने बताया कि वार्ड संख्या- आठ में बड़ी आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां के पप्पू यादव के घर में पानी है। उन्होंने बताया कि रतजगा करना पड़ता है। सांप-बिच्छू का डर अधिक सताता है।
