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    खगड़िया में मानवता शर्मसार, पैसों के अभाव में 3 दिनों तक पति के शव के पास बैठी रही पत्नी

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 07:04 AM (IST)

    खगड़िया में पैसों की कमी के कारण एक पत्नी तीन दिनों तक अपने मृत पति के शव के पास बैठी रही, क्योंकि वह दाह संस्कार नहीं कर पा रही थी। ...और पढ़ें

    बूढ़ी गंडक किनारे पति की चिता को मुखाग्नि देती पत्नी। (सौजन्य- ग्रामीण)

    बूढ़ी गंडक किनारे पति की चिता को मुखाग्नि देती पत्नी। (सौजन्य- ग्रामीण)

    HighLights

    1. खगड़िया में पत्नी ने तीन दिन तक पति का शव नहीं जलाया।

    2. पैसों की कमी और गरीबी के कारण दाह संस्कार रुका रहा।

    3. पार्षद और प्रशासन की मदद से बाद में अंतिम संस्कार हुआ।

    मुकेश, खगड़िया। खगड़िया में गुरुवार को उस समय मानवता भी शर्मशार होते दिखा जब लोगों को पता चला कि पैसो के अभाव व गरीबी की मार झेल रही एक पत्नी तीन दिनों से अपने पति का दाह संस्कार तक नहीं कर पा रही है।

    तीन दिनों से पति के शव के पास बैठकर पत्नी समाज, सरकार की व्यवस्था और भगवान को कोसकर सिसकियां भरती रहीं। मानवता इतनी शर्मशार होती दिखी कि उसके झोपड़ी के आसपास रहने वाले भी तीन दिनों तक इस हृदयविदारक घटना को नजर अंदाज करते रहे।

    जब शव से दुर्गंध आने लगा तो आसपास के लोग चर्चा करने लगे और बात निकलकर मुहल्ले से बाहर आई। लोगों के साथ ही नगर प्रशासन ने भी पत्नी को एच्छिक सहायता उपलब्ध करवाकर शव का दाह संस्कार करवाया।

    हालात, तब गंभीर दिखी जब मृतक मन्नु साह की पत्नी कफन पहनकर पति के चिता में आग लगाई। इस दृश्य को देखकर और जानकर हर किसी का कलेजा फटने लगा।

    वार्ड नंबर 14 के पार्षद पप्पू यादव ने बताया कि गुरूवार को जब उन्हें जानकारी मिली तो वे मृतक के घर पर गए सहयोग को लेकर हाथ बढाया, देखते देखते लोगों सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ नगर प्रशासन ने भी सहयोग का हाथ बढाया और सम्मान पूर्वक दाह संस्कार कराया गया।

    क्या है मामला

    मजदूरी करने वाले मन्नु साह तीन साल पहले दाननगर मुहल्ले में किराए के आवास में रहकर मजदूरी कर अपना परिवार चलाते थे। बांध के पार रामचंद्रा वार्ड पांच में कुछ साल पहले झुग्गी बनाकर रहने लगे।

    किसी तरह मजदूरी कर जीवकोपार्जन करते थे समय बीतने के साथ मन्नु साह को कैंसर हो गया। पैसे के अभाव में थोड़ा बहुत बीमारी का इलाज हुआ और तीन दिन पहले वह भगवान के प्यारे हो गए।

    उनकी पत्नी अकेली पति के शव के पास बैठकर तीन दिनों तक सिसकियां भरती रही। लोगों ने बताया कि मन्नु साह को एक बेटा है जो प्रदेश में कमाता है यह भी बताया कि मां को बेटा का फोन नंबर नहीं था इसलिए वह इस हृदयविदारक घटना को बेटे को नहीं बता पाई।

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    आसपास के लोग भी उन्हें तीन दिनों तक झांकने नहीं गए जब शव से बदबू आने लगी तब आसपास के लोगों ने इसकी जानकारी कुछेक बाहरी लोगों को दी, इसी दौरान सोशल मीडिया पर बात वायरल होने पर लोगों की संवेदना जगी और किसी तरह दाह संस्कार हुआ।

    खगड़िया शहर से सटे करीब डेढ़ किलोमीटर पर रामचंद्रा गांव अवस्थित है गरीबी इतनी थी कि इतनी भयावह बातों को जानने में लोगों को तीन दिन लग गए। बहरहाल, मानवता की कहानी लोग कहते तो हैं मगर धरातल पर सही मायने में मानवता होती तो तीन दिनों तक एक गरीब असहाय का शव पैसों के अभाव में नहीं पड़ रहता।

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    गुरूवार को जब इतनी हृदयविदारक घटना की जानकारी मिली तो ऐच्छिक सहायता करवाकर सम्मान पूर्व शव का दाह संस्कार करवाया गया। चूंकि तत्काल दाह संस्कार मानवता के नाते जरूरी था।

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    सिंधु कमल, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद खगड़िया।