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    Coal Smuggling: असम से बिहार तक फैला कोयला माफियाओं का जाल, सरकार को रोज लगाते हैं करोड़ों का चूना

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 08:17 PM (GMT+05:30)

    असम में अवैध कोयला खनन और बिहार में सक्रिय इंट्री माफिया के कारण सरकार को प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हो रहा है। फर्जी ई-वे बिलों के ज ...और पढ़ें

    बिहार में कोयला माफिया का आतंक। फाइल फोटो

    बिहार में कोयला माफिया का आतंक। फाइल फोटो

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    अमरेंद्र कांत, किशनगंज। असम में कोयला के अवैध खनन व बिहार में सक्रिय इंट्री माफिया के खेल की वजह से सरकार को हर दिन करीब एक करोड़ के राजस्व का घाटा हो रहा है।

    फर्जी ई-वे बिल व अन्य तरीकों से अवैध खनन में शामिल लोग इंट्री माफिया के माध्यम से कोयला की गाड़ियां बंगाल के रास्ते बिहार में प्रवेश करा रहे हैं।

    पिछले तीन माह में राज्य कर विभाग ने ऐसे ट्रकों को जब्त किया, जिसके पास फर्जी बिल रहने पर करीब दो करोड़ 42 लाख का जुर्माना वसूला गया।

    एनएच 327 ई व 27 से गुजरते हैं ट्रक

    असम से बंगाल होते हुए बिहार तक हर दिन सौ से अधिक कोयला लदे ट्रक एनएच 327 ई व 27 होकर गुजरते हैं। इनमें अधिकांश के पास के जीएसटी का वैध दस्तावेज नहीं रहता है।

    इंट्री माफिया के सहारे बिहार में यह ट्रक आसानी से बिहार में प्रवेश कर जाते हैं। कुछ दिन पहले पटना से पहुंची जीएसटी निगरानी ब्यूरो की टीम ने पांच जगहों पर अभियान चलाकर 23 ट्रक जब्त किए थे, जिसमें कोयला लदे नौ ट्रक थे। इन ट्रकों के जीएसटी कागजात पर शक होने के बाद जांच के लिए पूर्णिया राज्य कर आयुक्त व आइबी को सौंप दिया गया था।

    विभागीय जानकारी के अनुसार, एक ट्रक पर 35 से 40 टन कोयला लोड रहता है, जिसकी कीमत तीन लाख से अधिक रहती है। कोयला पर 18 प्रतिशत जीएसटी का प्रविधान है।

    एक ट्रक को दूसरे राज्य भेजने के लिए 50 हजार से अधिक का ई-वे बिल जमा करना पड़ता है, लेकिन कोयला अवैध खनन का रहने के कारण विक्रेता द्वारा खरीदार को सही मूल्य पत्र यानि बिल नहीं दिया जाता है।

    इस कारण फर्जी बिल के साथ फर्जी ई-वे बिल के सहारे ऐसे ट्रक एक राज्य से दूसरे राज्य होते हुए बिहार तक पहुंच जाता है।

    कैसे बनता है फर्जी ई वे बिल

    सही ई वे बिल बनाने के लिए विभागीय पोर्टल पर प्रविष्ट की जाती है। परंतु कोयला माफिया फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर ई-वे बिल जारी करती हैं और इसके माध्यम से जीएसटी चोरी की जाती है।

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    असली ई वे बिल को स्कैन कर कंप्यूटर के माध्यम से तिथि व अन्य में बदलाव कर भी फर्जी ई-वे बिल बना दिया जाता है। इसे पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारी आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं।

    सूत्र बताते हैं कि कोयला ही अवैध खनन का रहता है, जिस कारण इसी बिल व चालान को लेकर इंट्री माफिया से संपर्क कर वाहनों को बिहार में प्रवेश कराते हैं।

    पिछले दिनों बिहार पुलिस मुख्यालय ने भी इंट्री माफिया की सक्रियता को लेकर पत्र भेजा था, जिसमें 12 माफिया के नाम का उल्लेख भी किया गया है। हालांकि हाल के दिनों में पुलिस व प्रशासन की सख्ती के बाद वाहनों की जांच में तेजी आई है।

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