15 घंटे का सफर अब सिर्फ 8 घंटे में, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए किशनगंज में जमीन अधिग्रहण की तैयारी तेज
किशनगंज जिले में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ...और पढ़ें
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एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
किशनगंज में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू।
519 किमी लंबा एक्सप्रेसवे 32 हजार करोड़ की लागत से बनेगा।
यह परियोजना व्यापार, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देगी।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। सीमांचल के विकास को नई रफ्तार देने वाले गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अधियाचना भू-अर्जन विभाग को सौंप दी है। अब तीन प्रखंडों के 51 मौजा में जमीन अधिग्रहण कर परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है।
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे जिले के ठाकुरगंज, बहादुरगंज और टेढ़ागाछ प्रखंड से होकर गुजरेगा। इसके लिए ठाकुरगंज के 22, बहादुरगंज के 23 और टेढ़ागाछ के छह मौजा की भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
519 किलोमीटर लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे करीब 32 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगी गति
इस परियोजना के पूरा होने से सीमांचल क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, कृषि विपणन और पर्यटन को नई गति मिलेगी। नेपाल, बंगाल और पूर्वोत्तर भारत से बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होने से सामरिक दृष्टि से भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित होगा। निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
माना जा रहा है कि वर्तमान में गोरखपुर से सिलीगुड़ी की यात्रा में 14 से 15 घंटे का समय लगता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी महज 6 से 8 घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे माल परिवहन के साथ-साथ आम यात्रियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
भूमि का उचित मुआवजा तय करने के लिए छह सदस्यीय समिति बाजार दर का आकलन कर रही है। दर निर्धारण के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया और तेज होगी।
अक्षयवट तिवारी, भू-अर्जन पदाधिकारी