बिहार का अनोखा गांव: अब तक एक भी व्यक्ति मैट्रिक पास नहीं, 8वीं पढ़ने वाले मात्र 2; सामने आई बड़ी वजह
किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड का भवानीगंज गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। यहां आज तक कोई छात्र मैट्रिक पास नहीं कर सका है, और गांव में सड़क, स्कूल जैसी ...और पढ़ें

भवानीगंज के ग्रामीण। फोटो जागरण

समय कम है?
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बीरबल महतो, ठाकुरगंज (किशनगंज)। भारत-नेपाल सीमा से सटे ठाकुरगंज प्रखंड के दल्लेगांव पंचायत का वार्ड नं 09 का भवानीगंज (दक्षिण गांव) आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे छूटा हुआ है।
मेची नदी के पश्चिमी किनारे बसे इस छोटे से गांव की सबसे बड़ी पहचान इसकी बदहाली बन चुकी है। करीब 60 परिवारों और लगभग 300 की आबादी वाले इस गांव में आज तक एक भी छात्र मैट्रिक परीक्षा पास कर नहीं सका है। यह आंकड़ा केवल शिक्षा की बदहाल व्यवस्था नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत भी बयां करता है।
गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात के दिनों में मेची नदी उफान पर रहती है और कच्ची सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है। ऐसे में गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से लगभग कट जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ती है।
न स्कूल, न आंगनबाड़ी, शिक्षा का सपना अधूरा
भवानीगंज (दक्षिण टोला) में न तो आंगनबाड़ी केंद्र है और न ही प्राथमिक विद्यालय। छोटे-छोटे बच्चों को शुरुआती शिक्षा के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ता है। लंबी दूरी, खराब रास्ते और आर्थिक तंगी के कारण अधिकांश बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। नतीजा यह है कि गांव। के लोग आज भी अशिक्षा के अंधेरे में जीवन यापन कर रहे है।
ग्रामीण मो जियारत, अली मोहम्मद, मो अफसर, मो अबरार, अब्दुल खालिक, मंगल टुडू, अकिल टुडू, ड्राइवर मुर्मू आदि बताते हैं कि गांव के इतिहास में आज तक कोई भी छात्र मैट्रिक परीक्षा पास नहीं कर पाया है।
गांव के केवल दो युवक आठवीं तक पढ़ाई कर निजी सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे हैं, जबकि अधिकांश लोग खेतिहर मजदूर के रूप में काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हर घर नल का जल योजना अब तक नहीं पहुंची है। नली-गली जैसी बुनियादी योजनाओं का भी लाभ लोगों को नहीं मिल सका है।
हालांकि बिजली की लाइन गांव के पास से जरूर गुजरती है, लेकिन विकास की रोशनी अब भी इस टोले तक नहीं पहुंच सकी है। बारिश के मौसम में गांव की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है।
ग्रामीणों ने शिक्षा और सड़क को प्राथमिकता देने की उठाई मांगें
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव में प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र खोलने, पक्की सड़क का निर्माण कराने, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गांव में शिक्षा और आवागमन की व्यवस्था बेहतर हो जाए तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य बदला जा सकता है।
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भवानीगंज (दक्षिण टोला) की यह तस्वीर बताती है कि आजादी के दशकों बाद भी सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित उक्त गांव विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां के बच्चों के सपने अब भी एक स्कूल, एक सड़क और बेहतर भविष्य की उम्मीद पर विकास का मुंह ताक रहा हैं।