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    भोजपुर पुलिस को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, दलित युवक की गुमशुदगी का मामला 

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 08:42 PM (IST)

    पटना हाई कोर्ट ने दस महीने से लापता दलित युवक सनोज कुमार का पता न लगा पाने पर भोजपुर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

    सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने भोजपुर पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।

    2. दस महीने से लापता दलित युवक सनोज कुमार का पता नहीं।

    3. अदालत ने सीबीआई जांच सौंपने की चेतावनी दी।

    विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने दस महीने से लापता दलित युवक सनोज कुमार का अब तक पता नहीं लगा पाने पर भोजपुर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।

    अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब तक की जांच से वह संतुष्ट नहीं है और मामले की जांच में गंभीर खामियां दिखाई दे रही हैं। कोर्ट ने भोजपुर के एसपी समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले से जुड़े सभी अभिलेखों के साथ 2 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया, जबकि डीएम को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी।

    मंगलवार को सुनवाई के दौरान भोजपुर के डीएम, एसपी, जगदीशपुर थाना प्रभारी सहित अन्य अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद एवं न्यायाधीश कुमार मनीष की खंडपीठ सनोज कुमार के पिता गौरीशंकर राम द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    CBI को सौंपा जा सकता है मामला 

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दस महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस युवक का पता नहीं लगा सकी। अब तक सामने आए तथ्यों से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि उत्पाद पुलिस पूरी सच्चाई नहीं बता रही है तथा उसके बयानों में भी विरोधाभास है। अदालत ने एसपी से पूछा कि उन्होंने अपने स्तर पर क्या कार्रवाई की, लेकिन उनके जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ।

    खंडपीठ ने चेतावनी दी कि यदि जांच की दिशा और प्रगति संतोषजनक नहीं रही तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी जा सकती है। इस पर महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने अदालत को भरोसा दिलाया कि ऐसी स्थिति नहीं आएगी और वह स्वयं मामले की निगरानी कर जांच की प्रगति से कोर्ट को अवगत कराएंगे।

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    कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से संकेत मिलता है कि उत्पाद पुलिस ने युवक को हिरासत में लिया था और बाद में उसके भाग जाने की बात कही गई, लेकिन वह आखिर कहां गया, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि उत्पाद पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

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