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    ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बन रहा था नकली सीमेंट, किशनगंज पुलिस ने फैक्ट्री का किया पर्दाफाश

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 08:25 PM (GMT+05:30)

    किशनगंज पुलिस ने ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सीमेंट बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी में मास्टरमाइंड रफीक आलम को गिरफ्ता ...और पढ़ें

    13 टन से अधिक नकली सीमेंट जब्त, रात के अंधेरे में चलता था पूरा खेल

    13 टन से अधिक नकली सीमेंट जब्त, रात के अंधेरे में चलता था पूरा खेल

    संवाद सहयोगी, किशनगंज। ब्रांडेड सीमेंट कंपनियों के नाम पर नकली सीमेंट तैयार कर बाजार में खपाने वाले गिरोह का सदर पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

    सदर थाना क्षेत्र के समदा खिरदोह गांव में संचालित अवैध नकली सीमेंट फैक्ट्री पर सोमवार देर रात छापामारी कर पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड रफीक आलम को गिरफ्तार कर लिया, जबकि फैक्ट्री में काम कर रहे सात मजदूरों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। फैक्ट्री का दूसरा संचालक समीम अख्तर मौके से फरार हो गया।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 13 टन से अधिक सीमेंट, एक ट्रैक्टर डाला, विभिन्न ब्रांडों के खाली सीमेंट बैग और सीमेंट पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए।

    मौके से अल्ट्राटेक सीमेंट के 165 नकली बोरे, अडानी अंबुजा के नकली 51 बोरे, कंक्रीटो सीमेंट के नकली 50 बोरे, करीब 200 किलोग्राम खुला सीमेंट, पांच लोहे के माप कप तथा अल्ट्राटेक के नकली 102 खाली बोरे जब्त किए गए। बरामद सीमेंट के नमूनों को जांच के लिए सीलबंद कर दिया गया है और पूरे गोदाम को सील कर दिया गया है।

    सूचना के बाद बनी विशेष टीम

    सदर पुलिस को समदा गांव में नकली सीमेंट बनाने और भंडारण की सूचना मिल रही थी। इसके बाद प्रभारी एसपी हरिमोहन शुक्ला के निर्देश पर एसडीपीओ वन खुसरू सिराज के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम में सदर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

    सूचना के सत्यापन के बाद देर रात फैक्ट्री पर छापामारी की गई। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो फैक्ट्री का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद दरवाजा नहीं खोला गया। जिसके बाद एसडीपीओ खुसरू सिराज स्वयं मकान के पीछे पहुंचे और खिड़की तोड़कर पुलिस टीम के साथ अंदर दाखिल हुए।

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    अंदर का नजारा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। बाहर से सामान्य मकान दिखने वाले भवन के ग्राउंड फ्लोर में पूरी नकली सीमेंट फैक्ट्री संचालित हो रही थी, जहां रात के अंधेरे में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर सीमेंट तैयार किया जाता था।

    खराब सीमेंट को पीसकर तैयार होता था नकली माल

    हिरासत में लिए गए मजदूर नजरुल, हसीब, जाकिर, मोतीपुर रहमान सहित अन्य ने पूछताछ में बताया कि खराब और पत्थर बन चुके सीमेंट को पहले तोड़कर बारीक पाउडर बनाया जाता था। इसके बाद अन्य प्रक्रिया अपनाकर उसे ब्रांडेड कंपनियों के बैग में भरकर बाजार में भेज दिया जाता था।

    यह काम मुख्य रूप से रात के समय किया जाता था और ट्रैक्टर के जरिए सीमेंट की खेप विभिन्न स्थानों तक पहुंचाई जाती थी। मजदूरों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन छह घंटे काम के बदले 1,200 रुपये मजदूरी मिलती थी और फैक्ट्री में काम कुछ ही दिनों पहले शुरू हुआ था।

    पूछताछ के दौरान गिरफ्तार रफीक आलम ने पुलिस को बताया कि उसने भवन का ग्राउंड फ्लोर समीम अख्तर को किराये पर दिया था। हालांकि वह किरायेदारी से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

    पुलिस का मानना है कि पूरे कारोबार में दोनों की भूमिका संदिग्ध है और फरार समीम अख्तर की गिरफ्तारी के बाद कई और खुलासे हो सकते हैं।

    एसडीपीओ वन खुसरू सिराज ने बताया कि अवैध नकली सीमेंट फैक्ट्री और भंडारण की सूचना पर कार्रवाई की गई है। मामले में रफीक आलम और समीम अख्तर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। जब्त सीमेंट के नमूनों की जांच कराई जा रही है।

    जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि नकली सीमेंट की सप्लाई किन-किन जिलों और बाजारों में की जा रही थी।