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    अब DAC के बिना नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर, एजेंसियों और उपभोक्ताओं की बढ़ी चुनौतियां

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 02:00 PM (IST)

    घरेलू रसोई गैस वितरण के लिए अब डिजिटल आथेंटिकेशन कोड (डीएसी) 100% अनिवार्य हो गया है। इस नए नियम से गैस सिलिंडर की डिलीवरी बिना डीएसी के संभव नहीं होग ...और पढ़ें

    अब DAC के बिना नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर, एजेंसियों और उपभोक्ताओं की बढ़ी चुनौतियां (PTI)

    अब DAC के बिना नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर, एजेंसियों और उपभोक्ताओं की बढ़ी चुनौतियां (PTI)

    HighLights

    1. डीएसी अब घरेलू गैस सिलिंडर डिलीवरी के लिए 100% अनिवार्य।

    2. नए नियम से गैस एजेंसियों और उपभोक्ताओं की बढ़ी मुश्किलें।

    3. तकनीकी समस्याएँ और नेटवर्क कमी डीएसी प्राप्ति में बाधा।

    संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के वितरण को लेकर गैस कंपनियों ने नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) को शत-प्रतिशत अनिवार्य कर दिया गया है। बिना डीएसी के किसी भी उपभोक्ता को गैस सिलिंडर नहीं मिलेगा।

    इस नई व्यवस्था ने जहां पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है, वहीं गैस एजेंसी संचालकों और उपभोक्ताओं दोनों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। जानकारी के अनुसार, अब गैस सिलिंडर की डिलीवरी के समय उपभोक्ता के मोबाइल पर भेजे गए डीएसी नंबर को हॉकर को बताना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया के बिना डिलीवरी संभव नहीं है।

    पहले कंपनियों ने डीएसी की अनिवार्यता को 80 प्रतिशत तक सीमित रखा था, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 85, फिर 95 प्रतिशत किया गया और अब इसे पूरी तरह 100 प्रतिशत लागू कर दिया गया है।

    स्थानीय सरिता इंडेन गैस एजेंसी की प्रोपराइटर सरिता कालोंडिया ने बताया कि नए नियम के तहत यदि एजेंसी को 100 सिलिंडर मिलते हैं, तो सभी 100 सिलिंडर केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को दिए जा सकते हैं जिनके पास वैध डीएसी उपलब्ध है। बिना डीएसी एक भी सिलिंडर देना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा, जिससे एजेंसी पर कार्रवाई हो सकती है।

    इस सख्ती का असर खासकर वीआईपी, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर देखने को मिल रहा है। इनमें से अधिकांश के नाम पर व्यक्तिगत गैस कनेक्शन नहीं है। चूंकि इनका स्थानांतरण होता रहता है, इसलिए वे नया कनेक्शन लेने से बचते हैं।

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    ऐसे में उनके सरकारी आवासों पर रसोई गैस की व्यवस्था आपूर्ति विभाग के माध्यम से की जाती है, जहां बिना कनेक्शन नंबर के ही सिलिंडर उपलब्ध कराया जाता रहा है। अब डीएसी अनिवार्य होने के बाद ऐसी व्यवस्था पर रोक लग गई है, जिससे इन वर्गों के लोगों का दबाव सीधे गैस एजेंसियों पर बढ़ गया है।

    वहीं, कई एजेंसी संचालकों का कहना है कि यदि वे नियमों का पालन करते हैं तो प्रभावशाली लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है और यदि दबाव में आकर सिलिंडर देते हैं तो कंपनी की कार्रवाई का खतरा रहता है।

    दूसरी ओर, आम उपभोक्ता भी इस व्यवस्था से परेशान हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि समय पर डीएसी प्राप्त नहीं होने के कारण उन्हें गैस सिलिंडर लेने में दिक्कत हो रही है। तकनीकी समस्याएं, मोबाइल नेटवर्क की कमी या पंजीकृत नंबर में गड़बड़ी जैसी वजहों से भी डीएसी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे रसोई का काम प्रभावित हो रहा है।

    वहीं, कई उपभोक्ताओं ने कहा कि डीएसी प्रणाली से फर्जी वितरण और कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी दिक्कतों को दूर करना और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।