अविश्वास प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब नहीं चलेगा ‘अनुपस्थित’ का खेल, गैरहाजिरी से बचेंगे पद
सुप्रीम कोर्ट ने पंचायती राज में अविश्वास प्रस्ताव पर बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें सदस्यों की अनुपस्थिति से प्रस्ताव खारिज नहीं होगा बल्कि मतदान अनिवा ...और पढ़ें

अब नहीं चलेगा ‘अनुपस्थित’ का खेल! अविश्वास प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पोठिया में बढ़ी हलचल
HighLights
अविश्वास प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला।
मतदान अनिवार्य, सदस्यों की अनुपस्थिति से खारिज नहीं।
किशनगंज के पोठिया में राजनीतिक हलचल तेज हुई।
संवाद सूत्र, पोठिया (किशनगंज)। पंचायती राज व्यवस्था में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब केवल सदस्यों की अनुपस्थिति के आधार पर अविश्वास प्रस्ताव खारिज नहीं माना जाएगा, बल्कि हर हाल में वोटिंग कराकर बहुमत का फैसला लेना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण आदेश के बाद पूरे बिहार में नई राजनीतिक सरगर्मी देखी जा रही है, जिसका असर किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड में भी साफ दिख रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बदली प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 को अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वोटिंग जरूरी है। यदि बैठक में मत विभाजन नहीं होता है, तो प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी और प्रस्ताव स्वतः निरस्त नहीं माना जाएगा। इस आदेश के आलोक में पंचायती राज विभाग ने 17 अप्रैल 2026 को पत्र जारी कर सभी जिलों को निर्देश दिया है कि जहां भी इस तरह के मामले लंबित हैं, वहां 31 मई 2026 से पहले विशेष बैठक आयोजित कराई जाए।
पोठिया में फिर तेज हुई राजनीतिक हलचल
इस आदेश के बाद पोठिया प्रखंड में एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। पंचायत समिति सदस्यों ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर शीघ्र विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन भी इस मामले में सक्रिय हो गया है और जल्द ही बैठक की तिथि तय करने को लेकर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
2024 में अनुपस्थिति से गिर गया था प्रस्ताव
गौरतलब है कि पोठिया प्रखंड प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ 2 जनवरी 2024 को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके लिए 13 जनवरी 2024 को विशेष बैठक बुलाई गई थी। हालांकि उस दिन 30 सदस्यों में से केवल एक सदस्य ही बैठक में शामिल हुआ, जबकि 29 सदस्य अनुपस्थित रहे। इसके कारण न तो चर्चा हो सकी और न ही वोटिंग हो पाई। इसी आधार पर अविश्वास प्रस्ताव को गिरा हुआ मान लिया गया, जिससे मामला विवादों में घिर गया।
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हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस पूरे प्रकरण को लेकर मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा, जहां 18 सितंबर 2024 को महत्वपूर्ण आदेश दिया गया। कोर्ट ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान वोटिंग अनिवार्य है और बिना मत विभाजन के प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा सकती। इस आदेश को चुनौती देते हुए कई जनप्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और वोटिंग को अनिवार्य कर दिया।
अब फिर से होगी विशेष बैठक
नए निर्देशों के बाद अब पोठिया में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर फिर से विशेष बैठक बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला पदाधिकारी स्तर पर इस मामले की समीक्षा चल रही है और जल्द ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को आवश्यक निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। इस बार बैठक में सभी सदस्यों की उपस्थिति और वोटिंग सुनिश्चित कराई जाएगी, ताकि बहुमत के आधार पर स्पष्ट निर्णय लिया जा सके।
राजनीतिक समीकरण पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से पंचायत स्तर की राजनीति में पारदर्शिता बढ़ेगी। अब किसी भी पक्ष के लिए केवल अनुपस्थित रहकर प्रक्रिया को प्रभावित करना संभव नहीं होगा। पोठिया प्रखंड में भी इस फैसले का सीधा असर देखने को मिल रहा है, जहां आगामी बैठक को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और निर्णय बहुमत के आधार पर ही लिया जाएगा। पोठिया में होने वाली अगली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि स्थानीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।