कभी बाल विवाह में नंबर वन था बिहार का ये जिला, अब यूनिसेफ की रिपोर्ट में आई सुखद खबर
कभी बाल विवाह में बिहार में सबसे आगे रहने वाले लखीसराय में अब इस कुरीति में बड़ी गिरावट दर्ज की ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
लखीसराय में बाल विवाह दर में 26% की गिरावट।
यूनिसेफ और NFHS-6 रिपोर्ट ने आंकड़ों की पुष्टि की।
जागरूकता अभियानों और सरकारी प्रयासों का सकारात्मक असर।
मुकेश कुमार, लखीसराय। कभी बाल विवाह के मामले में बिहार में सबसे आगे रहने वाला लखीसराय अब इस सामाजिक कुरीति से बाहर निकलने की राह पर है। सरकारी प्रयासों और लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों का असर अब आंकड़ों में दिखाई देने लगा है।
यूनिसेफ और नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जिले में बाल विवाह की दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2019 में जहां जिले में 18 वर्ष से कम उम्र में लड़कियों की शादी की दर 56.1 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2026 में यह घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गई है।
आंकड़ों में करीब 26 प्रतिशत अंक की गिरावट को बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से चलाए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सहित विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों और किशोरियों की सोच में बदलाव आया है।
बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रविधानों की जानकारी बढ़ने से कम उम्र में शादी कराने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगा है।
100 दिन के अभियान ने गांव-गांव पहुंचाई बाल विवाह के खिलाफ आवाज
भारत सरकार ने 27 नवंबर 2025 को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया। इसके तहत महिला एवं बाल विकास निगम ने 100 दिवसीय बाल विवाह उन्मूलन अभियान की कार्ययोजना तैयार की।
जिले में अभियान को तीन चरणों में संचालित किया गया। जीविका दीदी, आशा, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका सहित विभिन्न स्तर के कर्मियों को अभियान से जोड़ा गया। पहले चरण में माध्यमिक एवं प्लस टू विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में गोष्ठी, प्रभातफेरी और चौपाल के माध्यम से किशोर-किशोरियों और अभिभावकों को जागरूक किया गया।
इसके बाद ग्राम पंचायतों और नगर निकाय क्षेत्रों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। लोगों को बाल विवाह के सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के साथ जिले की स्थिति की जानकारी दी गई। लगातार अभियान चलने से समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता बढ़ी है।
बिहार में पहले और देश में दूसरे स्थान पर था जिला
प्रशांत कुमार, जिला समन्वयक, महिला सशक्तीकरण केंद्र ने बताया कि लखीसराय बाल विवाह की रैंकिंग में कभी बिहार में पहले और देश में दूसरे स्थान पर था। वर्ष 2025 में शुरू किए गए 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को जिले में प्रभावी तरीके से संचालित किया गया।
विभिन्न विभागों के साथ विकासार्थ संस्था ने भी बाल विवाह रोकने और लोगों को जागरूक करने में सक्रिय योगदान दिया। इसके परिणामस्वरूप जिले में बाल विवाह की दर में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान आगे भी जारी रहेगा।
