सोलर प्लांट ने बदला टाली झरना का रास्ता, लखीसराय के किसानों पर गहराया सिंचाई संकट
लखीसराय के कजरा क्षेत्र में सोलर प्लांट निर्माण से टाली झरना का प्राकृतिक जलप्रवाह बाधित हो गया है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का संकट गहरा ...और पढ़ें

सोलर प्लांट ने बदला टाली झरना का रास्ता, लखीसराय के किसानों पर गहराया सिंचाई संकट (AI Generated Image)
HighLights
सोलर प्लांट से टाली झरना का जलप्रवाह बाधित हुआ।
हजारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का संकट।
किसान प्राकृतिक जलमार्ग बहाली और स्थायी व्यवस्था मांग रहे।
संवाद सूत्र, सूर्यगढ़ा (लखीसराय)। कजरा क्षेत्र में स्थापित सोलर पावर प्लांट के निर्माण के बाद टाली बिशनपुर पहाड़ से निकलने वाले टाली झरना का प्राकृतिक जलप्रवाह बाधित हो जाने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
झरने के पानी का पारंपरिक मार्ग बंद होने से खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। पानी के अभाव में धान समेत अन्य खरीफ फसलों की खेती संकट में पड़ गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, सोलर प्लांट बनने से पहले टाली झरना का पानी प्राकृतिक रूप से बहते हुए आसपास के खेतों तक पहुंचता था।
इसी जलस्रोत के सहारे बड़ी संख्या में किसान कम लागत में सिंचाई कर अच्छी खेती करते थे, लेकिन प्लांट निर्माण के दौरान झरने के प्राकृतिक जलमार्ग को बदलकर पानी का बहाव सोलर प्लांट क्षेत्र से होते हुए रेलवे खंता की ओर मोड़ दिया गया। इसके बाद खेतों तक पानी का प्रवाह लगभग बंद हो गया।
किसानों का कहना है कि अब उन्हें सिंचाई के लिए निजी संसाधनों और डीजल चालित पंपों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। समय पर पानी नहीं मिलने से धान सहित अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो कृषि उत्पादन के साथ किसानों की आय पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या से जिला प्रशासन और जिलाधिकारी को पूर्व में भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक प्राकृतिक जलमार्ग बहाल करने अथवा वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
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ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने, टाली झरना के प्राकृतिक जलप्रवाह को पुनः बहाल करने तथा किसानों के लिए स्थायी सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते समाधान होने पर क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है।