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    लखीसराय में मक्के की फसल पर कजरा पिल्लू का हमला, किसानों की चिंता बढ़ी

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 01:46 PM (IST)

    चानन प्रखंड में मक्के की फसल पर कजरा पिल्लू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। ...और पढ़ें

    लखीसराय में मक्के की फसल पर कजरा पिल्लू का हमला, किसानों की चिंता बढ़ी

    लखीसराय में मक्के की फसल पर कजरा पिल्लू का हमला, किसानों की चिंता बढ़ी

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    संवाद सूत्र, चानन (लखीसराय)। चानन प्रखंड के कई गांवों में इस वर्ष किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्के की खेती की है, लेकिन फसल पर बढ़ते कीट प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषकर देर से बोई गई मक्के की फसल में कजरा पिल्लू नामक कीट का हमला तेजी से फैल रहा है।

    यह कीट पौधों के तने को काटकर उन्हें नष्ट कर रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका सताने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि खेत में 10 से 20 प्रतिशत पौधे भी नष्ट हो गए तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।

    पौधों की संख्या कम होने से भुट्टों की संख्या घटेगी और उपज में कमी आएगी। मौसम की अनिश्चितता को भी किसान इस समस्या का प्रमुख कारण मान रहे हैं। कभी तेज धूप तो कभी लगातार हो रही बारिश के कारण फसल में कीटों का प्रकोप बढ़ गया है।

    जानकारी के अनुसार, 50 दिन तक की अवस्था वाली मक्के की फसल पर इस कीट का प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। कई किसानों ने कीटनाशकों का छिड़काव भी किया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।

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    किसानों का आरोप है कि कुछ खाद एवं कृषि दवा विक्रेता उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने कीटनाशक बेच रहे हैं, जिन्हें प्रभावी बताकर दिया जाता है, लेकिन उनका कीटों पर कोई असर नहीं पड़ता।

    महंगी खेती और बढ़ती लागत से परेशान किसान

    भलुई गांव के किसान कपिलदेव यादव, बनारसी महतो और गोविंद महतो ने बताया कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, सिंचाई और दवाओं पर भारी खर्च के बाद अब कीट प्रकोप ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में अधिकांश किसान अतिरिक्त पूंजी लगाने की स्थिति में नहीं हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रखंड के भलुई, बसुआचक, संग्रामपुर, मलिया, रामपुर, नगरदार, रेवटा और महुलिया समेत कई गांवों में करीब 500 एकड़ भूमि पर मक्के की खेती की गई है। यदि समय रहते कीट नियंत्रण नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    कृषि विभाग ने बताया बचाव का उपाय

    प्रखंड कृषि समन्वयक संदीप कुमार ने बताया कि मक्के की फसल को कजरा पिल्लू से बचाने के लिए ग्वाभा (पौधे के मध्य भाग) में दानेदार कीटनाशक अथवा मोरेंट 10जी का प्रयोग किया जा सकता है।

    उन्होंने सलाह दी कि प्रति एकड़ एक किलोग्राम दानेदार कीटनाशक का उपयोग करने से काफी हद तक फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

    उन्होंने बताया कि गहरे खेतों में, जहां बुआई देर से हुई है, वहां इस कीट के प्रकोप की शिकायत अधिक मिल रही है। कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी भी की जा रही है।

    बढ़ी किसानों की चिंता

    मक्के की फसल इस समय वृद्धि के महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में कीट प्रकोप ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है। किसान अब कृषि विभाग से प्रभावी दवा, तकनीकी सलाह और त्वरित सहायता की अपेक्षा कर रहे हैं ताकि उनकी मेहनत और निवेश सुरक्षित रह सके।

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