लखीसराय के आलू किसान संकट में: बंपर पैदावार के बावजूद नहीं मिल रहा उचित दाम, लागत निकालना भी मुश्किल
लखीसराय के चानन में आलू किसानों को बंपर पैदावार के बावजूद भारी नुकसान हो रहा है। बाजार में आलू की कीमत 4-5 रुपये प्रति किलो तक गिरने से लागत निकालना भ ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, चानन (लखीसराय)। इस वर्ष आलू की अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उत्पादन अधिक होने और बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से किसान आर्थिक दबाव में आ गए हैं।
हालत यह है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। जबकि भंडारण का खर्च अलग से बोझ बन गया है। आलू उत्पादक किसान इस समय कम कीमत, बढ़ती लागत और महंगे भंडारण के दोहरे-तिहरे दबाव में जूझ रहे हैं।
तिहरे दबाव में जूझ रहे
वर्तमान में आलू की कीमत करीब चार से पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल यानी लगभग चार-पांच रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे किसानों को अपनी मूल पूंजी निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसान बताते हैं कि एक कट्टठा में आलू की बोआई के लिए करीब 25 किलो बीज की आवश्यकता होती है।
इसकी कीमत लगभग पांच सौ रुपये पड़ती है। इसके अलावा खाद, सिंचाई, दवा और मजदूरी पर करीब 15 से 20 सौ रुपये तक खर्च हो जाता है। वहीं आलू की फसल तैयार होने के बाद किसानों के सामने भंडारण की भी बड़ी चुनौती खड़ी है। कच्चा आलू लंबे समय तक खुले में नहीं रखा जा सकता। उसमें सड़न का खतरा रहता है। ऐसे में किसान कोल्ड स्टोरेज का सहारा लेने को मजबूर हैं। जो किसानो के पास नही है।
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चानन के भलूई व बसुआचक आलू उत्पादक केन्द्र
चानन प्रखंड क्षेत्र के भलूई एवं बसुआचक गांव आलू उत्पादक का मुख्य केन्द्र है यहां के लगभग ढाई सौ किसानों ने लगभग एक सौ हेक्टेयर से अधिक जमीन पर आलू का खेती करते है। जो आलू उत्पादन कू बाद खेत से निकलते समय से तक करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल तक खर्च पहुंच जाता है।
कहते है किसान
- भलूई के किसान मकेशवर महतो ने बताया कि जब आलू की रोपाई की गई थी, उस समय कीमत 20 से 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से थी, लेकिन अब बेचने के समय मात्र चार से पांच रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इस भारी गिरावट से किसानों की स्थिति बदतर हो गई है।
- संजय महते ने कहा कि अब तक आलू को संभालकर रखा हुआ है, लेकिन बाजार में उचित कीमत पर खरीदने वाला कोई नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान असमंजस में हैं। लागत निकलना मुश्किल है।
- कृतिदेव महतो ने कहा कि खेत से निकला आलू अब धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। उचित कीमत नहीं मिलने से नुकसान बढ़ता जा रहा है और आगे खेती करना भी मुश्किल लग रहा है। सरकार को हम किसानों की मदद करनी चाहिए।
- बसुआचक गांव कू किसान राजकुमार यादव बताते हैं कि इस वर्ष उन्होंने अधिक मात्रा में आलू की खेती की, लेकिन उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण मजबूरी में चार रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने की नौबत आ गई है। किसानों की हालत इतनी खराब हो गई है।
- रंजीत यादव बताते है कि वर्तमान में कही-कही आलू खेत में ही पड़े है। मजदूर को आलू उखाडने और चुनने के एवज में प्रति मजदूर 20-25 किलो मजदूरी देना पड़ता है। जो एक दिन के मजदूरी से भी कम है। अगर बाजार की यह स्थिति रही तो किसान बेमौत मारे जाएगे।
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