Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    लखीसराय नीट फर्जीवाड़ा: सॉल्वरों को केंद्रों पर ले जाकर रीक्रिएट किया सीन, खुलती जा रही सेटिंग की परतें

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 08:22 PM (IST)

    पुलिस ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में आरोपितों को परीक्षा केंद्रों पर ले जाकर सीन रीक्रिएशन कराया, जिससे साजिश की परतें खुल रही हैं। ...और पढ़ें

    सॉल्वरों को केंद्रों पर ले जाकर रीक्रिएट किया सीन, खुलती जा रही सेटिंग की परतें

    सॉल्वरों को केंद्रों पर ले जाकर रीक्रिएट किया सीन, खुलती जा रही सेटिंग की परतें

    जागरण संवाददाता, लखीसराय। नीट-यूजी पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में पुलिस जांच अब उस चरण में पहुंच गई है जहां आरोपितों को घटनास्थल पर ले जाकर पूरी साजिश का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है।

    गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक सत्यापन एजेंसी के कर्मियों को लखीसराय थाना से कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों पर ले जाया गया, जहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों के समक्ष पूरी प्रक्रिया दोहराई।

    शाम चार बजे के करीब लखीसराय थाना सभी आरोपितों को पुलिस वाहन से सबसे पहले राजकीय प्लस टू विद्यालय हसनपुर ले जाया गया।

    केंद्र पर पहुंचते ही पुलिस अधिकारियों ने आरोपितों से उस दिन की गतिविधियों को क्रमवार दोहराने को कहा। प्रवेश द्वार, जांच बिंदु, बायोमेट्रिक सत्यापन स्थल और परीक्षा कक्ष तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का सीन रीक्रिएशन कराया गया। इसके बाद पुलिस टीम आरोपितों को लेकर केआरके उच्च विद्यालय पहुंची।

    यहां भी परीक्षा दिवस की परिस्थितियों को दोहराया गया। जांच के दौरान पुलिस ने यह समझने का प्रयास किया कि फर्जी परीक्षार्थी किस रास्ते से केंद्र में पहुंचे, बायोमेट्रिक जांच में उन्हें कैसे राहत दी गई और किस स्तर पर मिलीभगत हुई।

    इसके बाद पुलिस टीम केंद्रीय विद्यालय लखीसराय पहुंची, जिसे इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। यहीं मेडिकल छात्र मयंक कश्यप ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष बताया कि उसने बायोमेट्रिक प्रणाली को अपने नियंत्रण में लेकर असली अभ्यर्थी की उपस्थिति दर्ज कराई थी।

    इसके बाद फर्जी परीक्षार्थियों को बिना बायोमेट्रिक सत्यापन कराए परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश करा दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि तीनों परीक्षा केंद्रों के भीतर एवं बाहर उसकी टीम के अन्य सहयोगी मौजूद थे। ये लोग वास्तविक परीक्षार्थियों के साथ समन्वय बनाकर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में सहायता कर रहे थे, ताकि फर्जी परीक्षार्थियों की पहचान उजागर न हो सके।

    खबरें और भी

    केंद्र के बाहर सत्यापन के दौरान अपने ही लोगों के द्वारा भीड़ जमा कर दी गई ताकि उन्हें बायोमेट्रिक जांच करने में सुविधा हो।

    सीन रीक्रिएशन के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शिवम कुमार लगातार निगरानी करते रहे। इस पूरी कवायद का उद्देश्य फर्जीवाड़े की प्रत्येक कड़ी को जोड़ना और उन व्यक्तियों तक पहुंचना है जो अब तक गिरफ्त से बाहर हैं।

    इधर, साइबर थाना जब्त मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, चैट रिकार्ड, सोशल मीडिया संपर्क और वित्तीय लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच में जुटा है। जांच कर रही पुलिस का मानना है कि सीन रीक्रिएशन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से जल्द ही गिरोह के फरार सरगनाओं और अन्य सहयोगियों की पहचान हो सकेगी।

    पुलिस के रडार पर बीएमआईएमएस पावापुरी का छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट समेत कई संदिग्ध हैं, जिनकी तलाश जारी है।

    पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने बताया कि गिरफ्तार मेडिकल छात्रों की शैक्षणिक पहचान, नामांकन और अन्य विवरणों के सत्यापन के लिए संबंधित मेडिकल कॉलेजों एवं शिक्षण संस्थानों से संपर्क किया जा रहा है। कई सॉल्वर के दो-दो नाम सामने आ रहे हैं, इसलिए जांच के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

    यह भी पढ़ें- नीट फर्जीवाड़ा: लखीसराय में 30 आरोपी भेजे गए जेल, अब मास्टरमाइंड और सेटरों की तलाश तेज