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कांवड़िया पथ पर दिखी अनोशी शिव भक्ति, घुटनों के बल बाबाधाम निकले लखीसराय के सुबोध कुमार,

Published: Fri, 31 Jul 2026 01:10 PM (IST)

लखीसराय के उपमुखिया सुबोध कुमार ने श्रावणी मेला में घुटनों के बल बाबा बैद्यनाथधाम जाने का संकल्प लिया है। उनकी ...और पढ़ें

HighLights

  1. लखीसराय के उपमुखिया सुबोध कुमार घुटनों के बल बाबाधाम जा रहे।

  2. श्रावणी मेला में उनकी यह कठिन तपस्या श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

  3. दो साथी घुटनों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्था में सहयोग कर रहे हैं।

संवाद सूत्र, लखीसराय। श्रावणी मेला की शुरुआत के साथ ही आस्था, विश्वास और तपस्या का अद्भुत संगम श्रावणी पथ पर दिखाई देने लगा है। हजारों शिवभक्त अजगैवीनाथ धाम से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथधाम की ओर बढ़ रहे हैं। कोई नंगे पांव, कोई डाक कांवड़ तो कोई विशेष व्रत और संकल्प के साथ यात्रा कर रहे हैं। 

इन्हीं शिवभक्तों के बीच लखीसराय जिले के दियारा क्षेत्र स्थित पिपरिया प्रखंड की रामचंद्रपुर पंचायत के उपमुखिया सुबोध कुमार अपनी कठिन साधना से श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

घुटनों के बल बाबाधाम जाने का संकल्प

सुबोध कुमार ने पहली बार घुटनों के बल बाबा बैद्यनाथधाम तक पहुंचने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास से किया गया हर संकल्प भगवान भोलेनाथ अवश्य स्वीकार करते हैं। 

इसी विश्वास के साथ वे अजगैवीनाथ से गंगाजल लेकर घुटनों के बल देवघर की ओर बढ़ चले हैं। उनका लक्ष्य बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचकर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना और जलाभिषेक करना है।

गांव के दो साथी भी उनके साथ चल रहे 

यह यात्रा आसान नहीं है। श्रावणी पथ की गर्म सड़क, पथरीले रास्ते और लंबी दूरी हर पल उनकी परीक्षा ले रहे हैं। फिर भी यात्रा के दूसरे दिन शुक्रवार तक उनके चेहरे पर न थकान दिखी और न ही कोई शिकायत। हर कदम के साथ उनके मुख से बोल बम और हर-हर महादेव का जयघोष गूंज रहा है।

इस कठिन तपस्या में गांव के दो साथी भी उनके साथ चल रहे हैं। जैसे ही सुबोध कुमार घुटनों के बल आगे बढ़ते हैं, उनके सहयोगी तुरंत घुटनों के नीचे फोम रख देते हैं ताकि लगातार रगड़ से घुटने जख्मी न हों। वे भोजन, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। उनकी यह सेवा भी श्रद्धा और समर्पण का अनुपम उदाहरण बन गई है।

सुबोध कुमार को देख ठहर जाते हैं कांवड़िए

श्रावणी पथ पर गुजरने वाले कांवड़िये और राहगीर जब सुबोध कुमार की तपस्या देखते हैं तो कुछ पल के लिए ठहर जाते हैं। कई लोग उनके संकल्प को प्रणाम करते हैं तो कई लोग बोल बम का उद्घोष कर उनका उत्साह बढ़ाते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि आज के दौर में ऐसी कठिन धार्मिक साधना विरले ही देखने को मिलती है।

श्रावणी मेला के पहले ही दिन सुबोध कुमार की यह अनूठी कांवड़ यात्रा आस्था, विश्वास और संकल्प की मिसाल बन गई है। उनका कहना है कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से ही यह कठिन यात्रा पूरी होगी और वे अपने संकल्प को सफल बनाकर ही लौटेंगे।

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