अक्षय तृतीया 2026 : 20 अप्रैल को बन रहा खास संयोग, बिना मुहूर्त देखें करें ये शुभ काम, मिलेगा अक्षय फल
अक्षय तृतीया 20 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी, जिसमें शुभ मुहूर्त और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन किए गए सभी शुभ कार्यों का अक्षय फल मि ...और पढ़ें

अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को:
HighLights
अक्षय तृतीया 20 अप्रैल 2026 को, शुभ मुहूर्त में।
सर्व सिद्ध मुहूर्त, बिना पंचांग देखे शुभ कार्य करें।
विवाह, खरीदारी, नए काम से मिलता है अक्षय फल।
संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला अक्षय तृतीया का पर्व इस बार सोमवार, 20 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है, इसलिए इसका विशेष महत्व माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और नक्षत्र का संयोग
मकदमपुर निवासी पंडित पवन झा के अनुसार अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त 19 अप्रैल को दोपहर 1:09 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल की सुबह 10:45 बजे तक रहेगा। वहीं 20 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र प्रातः 7:46 बजे से रात्रि तक प्रभावी रहेगा। उदयातिथि के आधार पर इसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।
पौराणिक मान्यता और महत्व
पंडित पवन झा ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन किए गए सभी शुभ कार्यों का अक्षय फल मिलता है, यही कारण है कि इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। भविष्य पुराण में इस तिथि को उगादि तिथियों में शामिल किया गया है और इसे अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ भी इसी तिथि से हुआ था।
सर्व सिद्ध मुहूर्त के रूप में खास पहचान
अक्षय तृतीया को सर्व सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, जिसमें बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, वस्त्र व आभूषण की खरीदारी, भूमि या वाहन खरीदने जैसे कार्य विशेष फलदायी होते हैं। नए कार्यों की शुरुआत, संस्था की स्थापना या उद्घाटन भी इस दिन करना शुभ माना जाता है। साथ ही पितरों के लिए पिंडदान या दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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धार्मिक कार्यों का विशेष फल
इस दिन गंगा स्नान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लोग इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं।
अवतार और धार्मिक परंपराएं
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम का अवतार भी इसी दिन लिया था। ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी तिथि को हुआ माना जाता है। इस दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट भी खुलते हैं और श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिरों में विशेष दर्शन की परंपरा
अक्षय तृतीया के दिन वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में विशेष परंपरा निभाई जाती है। इस दिन ही श्रद्धालुओं को भगवान के चरण दर्शन होते हैं, जबकि पूरे वर्ष वे वस्त्रों से ढंके रहते हैं। इसी कारण इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।