बिहार में जाति-आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियम में बदलाव, आमजन की बढ़ी मुश्किलें
पुरैनी, मधेपुरा में जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियमों में बदलाव से आम जनता, खासकर छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। पहले केवल आधार कार्ड से आव ...और पढ़ें

बिहार में जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने के नियम में हुआ बदलाव (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए सरकारी स्तर से पूर्व के नियम में बदलाव कर दिया गया है। नए नियम से आमलोगों सहित खासकर छात्र-छात्राओं की परेशानी काफी बढ़ गई है।
मालूम हो कि नया नियम लागू होने से स्थानीय बाजार में स्थित कैफे, वसुधा केंद्र या अन्य माध्यमों से ऑनलाइन आवेदन किए जाने पर वह अस्वीकृत हो जाया करता था, लेकिन नए नियमों की जानकारी के अभाव में आरटीपीएस काउंटर पर पहुंचने वाले आमलोग खासकर छात्र-छात्राओं को विभिन्न दस्तावेजों को एकत्रित करने के लिए वापस लौटना पड़ रहा है।
पूर्व में सिर्फ आधार कार्ड के माध्यम से जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने पर स्वीकृत हो जाता था और प्रमाण पत्र भी बन जाया करता था, जबकि अब नए नियम के तहत कई तरह के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
क्या बोले अंचलाधिकारी विद्यानंद झा?
इस बाबत अंचलाधिकारी विद्यानंद झा ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र के लिए अभिलेख के तौर पर खतियान, दान पत्र भूमि से संबंधित दस्तावेज, भूमिहीनों का पर्चा अथवा राजस्व अभिलेख आदि दिया जाना जरूरी है। आय प्रमाण पत्र के लिए वेतन, पेंशन पर्ची, आयकर रिटर्न अभिलेख की जरूरत है।
इसी तरह निवास प्रमाण पत्र के लिए अभिलेख के तौर पर खतियान, दान पत्र भूमि से संबंधित दस्तावेज, वासगीत पर्चा, राशन कार्ड, निर्वाचन पहचान पत्र, विद्युत विपत्र, दूरभाष विपत्र, आधार कार्ड के अतिरिक्त देने होंगे। तभी इस प्रमाण पत्र के लिए आवेदन को सब्मिट किया जाएगा।
खबरें और भी
सीओ ने बताया कि अब किसी भी प्रकार के जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्र के लिए आरटीपीएस पर कोई सेवा शुल्क नहीं लिया जाता है। आवेदन फ्री ऑनलाइन किया जाता है। साथ ही समय सीमा के अंदर आवेदनों का निष्पादन कर उसकी मूल प्रति आवेदक को निश्शुल्क आरटीपीएस काउंटर से ही मिल जाता है।