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    चैती नवरात्र 2026 : मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान का क्या है धार्मिक अर्थ, जानें शुभ-अशुभ संकेत

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 06:15 AM (IST)

    वासंतिक नवरात्रि गुरुवार को कलश स्थापना के साथ शुरू होगी, जिसमें मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होगी। इस बार मां दुर्गा का आगमन डोली पर ...और पढ़ें

    वासंतिक नवरात्रि: मां के आगमन और प्रस्थान से जुड़ा धार्मिक महत्व

    वासंतिक नवरात्रि: मां के आगमन और प्रस्थान से जुड़ा धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. गुरुवार से वासंतिक नवरात्रि कलश स्थापना के साथ होगी शुरू।

    2. मां दुर्गा का डोली पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान अशुभ।

    3. रामनवमी का विशेष महत्व, भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव।

    संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। वासंतिक नवरात्रि गुरुवार को कलश स्थापना के साथ शुरू होगी। कलश स्थापना के दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। प्रखंड अंतर्गत कुरसंडी गोठ बस्ती स्थित मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्रद्धालु अपने-अपने घरों में भी कलश स्थापना की तैयारी में जुट गए हैं। बाजारों में पूजा सामग्री और बर्तनों की खरीदारी के लिए भीड़ बढ़ गई है।

    पंडित पवन झा ने बताया कि वासंतिक नवरात्रि के दौरान अधिकांश लोग अपने घरों में कलश स्थापना करके मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा सामग्री, फल और धार्मिक सामान की दुकानों में विशेष भीड़ देखी जा रही है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में देवी के आगमन और प्रस्थान का विशेष महत्व होता है।

    माता का डोली व हाथी पर आगमन

    इस बार चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन डोली पर होगा, जबकि उनका प्रस्थान हाथी पर होगा। पंडित पवन झा के अनुसार देवी का डोली पर सवार होकर आना शुभ संकेत नहीं माना जाता। ऐसा आगमन कभी-कभी मुश्किल परिस्थितियों का संकेत कर सकता है। वहीं, हाथी पर प्रस्थान भी धर्मशास्त्र के अनुसार शुभ नहीं है।

    रामनवमी का विशेष महत्व

    वासंतिक नवरात्रि के दौरान रामनवमी का दिन भी विशेष महत्व रखता है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में रावण का वध करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। जन्म अयोध्या में राजा दशरथ के घर रानी कौशल्या की कोख से हुआ और नक्षत्र पुनर्वसु तथा कर्क लग्न में हुआ।

    खबरें और भी

    रामनवमी के अवसर पर देशभर में राम जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और धार्मिक आयोजन, झांकियां और भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

    वासंतिक नवरात्रि में कलश स्थापना से लेकर नौ दिनों तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा। श्रद्धालु इसे अपने घरों और मंदिरों में धूमधाम से मनाते हैं और देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।