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    होली पर चंद्र ग्रहण का साया, कब होगा होलिका दहन; कब खेलना है रंग? यहां जानिए एक-एक बात

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 07:30 PM (IST)

    पुरैनी, मधेपुरा में होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस साल भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन 3 मार्च की बजाय 2 मार्च को होगा। होली का त्योहार ...और पढ़ें

    AI Generated Image.

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    HighLights

    1. भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन 2 मार्च को।

    2. होली का त्योहार इस साल 4 मार्च को मनाया जाएगा।

    3. सूतक काल में पूजा-पाठ वर्जित, ग्रहण बाद गंगाजल छिड़कें।

    संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। होली के जश्न के लिए प्रखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाके में भी इसकी तैयारी होने लगी है। रंगों का त्योहार होली को लेकर मुख्य बाजारों में दुकानें सज गई है। हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस साल तीन मार्च को होलिका दहन पर भद्रा एवं चंद्र ग्रहण का एक साथ बताया जा रहा है। इस कारण दो मार्च को ही होलिका दहन किया जाएगा। चार मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा।

    ऐसा माना जाता है कि भद्राकाल और ग्रहण का सूतक काल दोनों ही समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है। इस कारण तीन मार्च को दोपहर 1:00 से शाम 6:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक सभी मंदिर बंद रहेंगे। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान नही की जानी चाहिए।

    उक्त जानकारी देते हए मकदमपुर निवासी पंडित पवन झा ने बताया कि सूतक काल और चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारतीय समय के अनुसार तीन मार्च को चंद्र ग्रहण का प्रभाव शाम 6:26 बजे चंद्रोदय के साथ ही दिखने लगेगा और यह शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। हालांकि, ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं दोपहर 02:16 बजे से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन सूतक काल का विशेष महत्व होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूतक काल दोपहर 1:00 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। जो शाम 6:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की मनाही होती है। इसलिए होलिका दहन 02 मार्च एवं होली 04 मार्च को मनाया जाएगा।

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    ग्रहण समाप्ति पर गंगाजल का करें छिड़काव:

    पंडित पवन झा ने बताया कि भद्रा एवं सूतक के दोष से बचने के लिए सहजता के साथ कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान वातावरण की नकारात्मकता का प्रभाव न पड़े इसके लिए ओम नमो भगवते वासुदेवाय का निरंतर मानसिक जाप करनी चाहिए।

    शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। साथ ही फिर शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें। होलिका की अग्नि में अनाज एवं नारियल अर्पित करने से घर में सुख शांति आती है।

    माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से किसी भी प्रकार के ग्रहों की उग्रता शांत होती है। साथ ही घर के संचालन में आ रही बाधाएं स्वत: दूर हो जाती है।