मधेपुरा: कोसी नदी में समा गई 500 एकड़ खेतिहर जमीन, DM-SP को किसानों ने सुनाई पीड़ा
मधेपुरा के आलमनगर में कोसी नदी के कटाव से 500 एकड़ कृषि भूमि बह गई है, जिससे कई गांव खतरे में हैं। जिलाधिकारी ने निरीक्षण कर ग्रामीणों को कटावरोधी कार ...और पढ़ें

कोसी नदी में समा गई 500 एकड़ खेतिहर जमीन, DM-SP को किसानों ने सुनाई पीड़ा
HighLights
कोसी कटाव से आलमनगर में 500 एकड़ कृषि भूमि नष्ट।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण कर कटावरोधी कार्य का आश्वासन दिया।
विधानसभा उपाध्यक्ष ने उपमुख्यमंत्री से बचाव कार्य पर चर्चा की।
संवाद सूत्र, आलमनगर (मधेपुरा)। आलमनगर प्रखंड की गंगापुर पंचायत स्थित हड़जोरा घाट व लूटना टोला के समीप कोसी नदी का धारा गांव की ओर मुड़ गई है। इस वजह से हरजोड़ा घाट, माड़वाड़ी वासा और लुटना गांव के समीप लगभग 500 मीटर दूरी तक किसानों का लगभग 500 एकड़ खेतिहर जमीन कोसी नदी के कटाव की भेंट चढ़ गई है।
कटाव की जानकारी मिलने पर मंगलवार को जिलाधिकारी अभिषेक रंजन व पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह निरीक्षण को पहुंचे।
जिलाधिकारी के काफिले में आपदा एडीएम मुकेश कुमार, उदाकिशुनगंज एसडीएम पंकज कुमार घोष सहित अन्य विभागीय अधिकारी व जल निस्सरण प्रमंडल कोपरिया के अभियंता नीरज कुमार, बीडीओ अजय कुमार, अंचलाधिकारी अंकेश कुमार कटाव स्थल पर ट्रैक्टर से पहुंचकर जायजा लिया।

इस दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से बात कर उनकी पीड़ा को समझा और बाढ़ के बने हालात में कटावरोधी कार्य शुरू कराने को लेकर जल संसाधन विभाग और राज्य सरकार से बात करने की बात कही। उन्होंने किसानों और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि हरसंभव उपाय किए जाएंगे।
कम्युनिटी किचन व बाढ़ राहत जल्द शुरू करने का दिया निर्देश:
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ आश्रय स्थलों व सामुदायिक रसोई चलाने वाले स्थलों का भी जायजा लिया। संबंधित अधिकारियों को उन्होंने तैयारी पूरी करने को कहा।
जिलाधिकारी ने कहा कि आश्रय स्थल व कम्युनिटी किचेन वाले जगहों पर चापाकल तत्काल दुरुस्त कराएं और बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
साथ ही उन्होंने कहा कि जीआर राशि के लिए लाभुकों का बैंक खाता अपडेट कराया जा रहा है, ताकि किसी को भी परेशानी नहीं हो। बाढ़ आपदा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
कटाव से 500 मीटर की दूरी पर बसी आबादी पर है संकट:
पीड़ित किसानों ने जिलाधिकारी को बताया कि आज लगभग एक माह से कोसी नदी में कटाव हो रहा है। जिस वजह से हम लोगों का सैकड़ों एकड़ जमीन कोसी नदी में समा गया है। अगर इसी तरह कटाव होता रहा तो हमारा गांव जो अब कोसी नदी से सिर्फ 500 मीटर दूर बचा है वह भी पांच से 10 दिनों में कट जाएगा।
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ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अपील की कटावरोधी व बचाव को लेकर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाए ताकि हम लोगों का गांव बच सके। जिलाधिकारी ने विभागीय पदाधिकारी के साथ इस पर विस्तार से चर्चा किकी। तत्काल कोई ठोस उपाय करने की बात कही।
छह ट्रैक्टरों से कटाव स्थल पर पहुंचा प्रशासनिक अमला:
कोसी नदी किनारे हो रहे काटाव की खबर दैनिक जागरण में लगातार प्राथमिकता के साथ प्रकाशित किए जाने पर अंततः जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। मंगलवार को एसपी एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ वे हड़जोरा घाट मध्य विद्यालय पहुंचे। इसके बाद कोसी नदी तक जाने के लिए ट्रैक्टर से रवाना हुए।
लगभग आधे दर्जन ट्रैक्टर के काफिले के प्रशासनिकल अधिकारी दो किलोमीटर की दूरी तयक कटाव स्थल पर पहुंचे। कटाव स्थल पर जिलाधिकारी ने कहा कि जलस्तर में कमी आने के बाद ही कटावरोधी कार्य चालू हो जाएगा। फिलहाल कटाव और आगे नहीं बढ़े, इसके लिए अभियंता नीरज कुमार को कोई ठोस उपाय करने का उन्हाेंने निर्देश दिया।
विधानसभा उपाध्यक्ष ने उपमुख्यमंत्री से की बात:
विधानसभा उपाध्यक्ष सह स्थानीय विधायक नरेंद्र नारायण यादव ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि आलमनगर प्रखंड में हड़जोरा घाट व लूटना टोला और चौसा प्रखंड के अमनी बासा में हो रहे कटाव से बचाव को लेकर उन्होंने उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी से बात की है।
इसके अलावा बिहार के मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग के सचिव, जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख और मधेपुरा के जिलाधिकारी से दूरभाष पर वार्ता कर बचाव कार्य कराए जाने को कहा है।
विस उपाध्यक्ष ने बताया कि जल संसाधन विभाग की एक टीम स्थल का निरीक्षण कर चुकी है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में भी एक टीम स्थल पर पहुंची है। बहुत जल्द कटाव निरोधक कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
वहीं, महागठबंधन नेता इंजीनियर नवीन निषाद ने बताया कि इतने बड़े पैमाने हो रहे कटाव की वजह से सैंकड़ो एकड़ खेतिहर जमीन नदी में समा गया है। इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि एक महीने से किसान आवाज उठा रहे हैं कि उनकी जमीन कोसी नदी में समा रहा है, लेकिन कटाव को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।