Madhepura News: 'जान दे देंगे पर जमीन नहीं...', बियाडा के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का एलान
उदाकिशुनगंज के लश्करी गांव में किसान बियाडा द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के लिए 276 एकड़ भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे छोटे औ ...और पढ़ें


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संवाद सूत्र, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)। उदाकिशुनगंज प्रखंड के लश्करी गांव में औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए बियाडा द्वारा जमीन अधिग्रहण करने का किसानों ने विरोध किया है। गांव में बैठक कर लोगों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध जताया। बैठक में गांव के सैकड़ों किसान शामिल हुए।
इस दौरान किसानों ने साफ तौर पर कहा कि वह अपनी जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे। इस मामले में मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों को आवेदन भी प्रेषित किया गया है। जिसमें भूमि अधिग्रहण किए जाने का विरोध जताया गया है।
किसानों का कहना है कि वह सभी छोटे सीमांत किसान हैं। उन लोगों के पास ज्यादा जमीन नहीं है। किसी के पास एक बीघा, किसी के पास 10 कट्ठा और किसी के पास कट्ठा-डंडा भर जमीन है। यदि जमीन अधिग्रहण होता है तो किसानों के जीविकोपार्जन का साधन छीन जाएगा। परिवार चलाने में दिक्कत होगी। लोगों ने जमीन अधिग्रहण के विरोध में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।
मालूम हो कि लश्करी पंचायत में औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए 276 एकड़ जमीन अधिग्रहण किया जाना है। यह प्रस्ताव पूर्व से तय है। आधिकारिक तौर पर प्रकिया आगे बढ़ चुका है।
बैठक में मौजूद पंचायत के मुखिया रजनीश कुमार उर्फ बबलू दास ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहण होने से सैकड़ों लोगों के सामने आफत आ जाएगा। लोगों को घर चलाने में मुश्किल होगी। लोगों को खेती के अलावा जीवकोपार्जन का कोई साधन नहीं है। खेती-बाड़ी कर लोग अपना पेट पाल रहे हैं। खेती के भरोसे बच्चों का शिक्षा हो रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस छोटे से गांव में उधोग नहीं लगाएं। उधोग लगने से किसानों पर बड़ी सामंत आ जाएगी। लोग भूख से बिलखते रहेंगे।
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मुखिया बबलू दास ने कहा कि किसानों का जमीन अधिग्रहण नहीं हो, इसके लिए वह सभी किसी भी हद तक जा सकते हैं। कहा, इसके लिए गांव से लेकर प्रखंड, जिला स्तर तक आंदोलन करेंगे। आखिर में किसानों के साथ आत्मदाह भी कर लेंगे।
विरोध जताने वाले किसानों में दिलखुश कुमार, वरूण राय, नित्यानंद यादव , राजेश्वर राव, शिवनेश्वरी राय, सीता राम यादव, फोचो यादव, चितनारायण चौधरी, मोहन यादव, लालबहादुर यादव, रमेश यादव आदि शामिल रहे। इल लोगों ने बताया कि वे लोग छोटे-छोटे किसान हैं। यदि उन लोगों के पास से जमीन चली जाएगी तो खाने को लाले पड़ जाएंगे। जीवन जीने का सहारा नहीं मिल पाएगा। हमारी जमीन का मुआवजा देकर तत्काल शांत तो करा दिया जाएगा, लेकिन उस राशि से आगे जीवन बेहतर नहीं हो सकता हैं। लोगों ने अधिकारी से इन लोगों की जमीन अधिग्रहण नहीं करने का आग्रह किया है।