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    50 हजार की लागत, लाखों का मुनाफा: पपीते की खेती से मधेपुरा के किसान ने बदली अपनी किस्मत

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 05:12 PM (GMT+05:30)

    पुरैनी के किसान विजय कुमार मेहता ने पारंपरिक खेती छोड़ पपीता की खेती अपनाकर अपनी आय दोगुनी की है। कम लागत, कम समय में उत्पादन और सालभर मांग के कारण यह ...और पढ़ें

    पपीते की खेती से मधेपुरा के किसान ने बदली अपनी किस्मत

    पपीते की खेती से मधेपुरा के किसान ने बदली अपनी किस्मत

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    प्रदीप आर्या, पुरैनी (मधेपुरा)। प्रखंड क्षेत्र के किसान अपनी आय दोगुनी करने के उद्देश्य से पारंपरिक खेती के साथ अब नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में पुरैनी मुख्यालय निवासी किसान विजय कुमार मेहता ने पपीता की खेती कर अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

    कम लागत व कम समय में उत्पादन एवं सालभर स्थानीय बाजार से लेकर बाहर के बड़े बाजारों में मांग होने के कारण पपीता की खेती काफी लाभदायक साबित हो रही है।

    पपीता की खेती से किसानों को फलों की बिक्री से लागत से दोगुना आमदनी:

    पपीता की खेती से किसानों को फलों की बिक्री से लागत से दोगुना आमदनी प्राप्त होती है। इसके अलावा पौधों की नर्सरी तैयार करने से भी अतिरिक्त आमदनी होती है। यही वजह है कि पपीता की खेती से किसानों को दोहरी कमाई का अवसर मिलता है।

    एक एकड़ में पपीता की खेती से लाखों रुपये तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसकी देखभाल एवं रखरखाव अन्य फसलों की तुलना में अपेक्षाकृत आसान होता है।

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    16 रुपये प्रति पौधा की दर से खरीदे थे लोकल किस्म के 1200 पौधे:

    मुख्यालय पंचायत पुरैनी के वार्ड नंबर 11 निवासी प्रगतिशील किसान विजय कुमार मेहता ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष एक बीघा की रकबा में पपीता की खेती शुरू की। उन्होंने नवगछिया के एक नर्सरी से लोकल किस्म के 16 रुपये प्रति पौधा की दर से 1200 पौधे खरीदे थे।

    पौधा लगाने के छह माह बाद पिछले वर्ष अक्टूबर से फल तोड़ना शुरू किया। इस दौरान उन्हें एक बीघा में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आई। अक्टूबर माह से प्रत्येक माह उनके रख-रखाव पर पांच से छह हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।

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    उन्होंने बताया कि अक्टूबर से हर माह 20 से 25 क्विंटल फल तोड़ा जा रहा है, जिसे 25 से 30 रुपये प्रति किलो की दर से आसपास के जिलों के व्यापारियों को खेत से ही बेचा जा रहा है। अच्छी देख-रेख एवं रखरखाव से दो साल तक खेतों में लगे पेड़ से फल प्राप्त किया जा सकता है।

    अब पपीते की खेती से प्राप्त हो रही है नियमित आय:

    विजय कुमार मेहता की मानें तो पपीता की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। पहले वे केवल धान, गेहूं एवं मक्का की खेती पर निर्भर थे, लेकिन अब पपीते की खेती से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। इससे अन्य किसानों का भी इस खेती की ओर रुझान बढ़ने लगा है।

    प्रखंड कृषि पदाधिकारी अंशूली प्रिया के अनुसार, पपीते में विटामिन ए एवं सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिससे बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। समय पर सिंचाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं रोग नियंत्रण विधि अपनाकर किसान पपीता का बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।

    कृषि विभाग भी किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से पपीता की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो कम भूमि में भी अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। पपीता की खेती क्षेत्र में किसानों के लिए रोजगार एवं दोगुना आय का नया विकल्प बन सकती है।