एक कथा, कई संदेश… और नकारात्मकता होती गई दूर, मधेपुरा के फनहन गोठ बस्ती में शुरू हुआ विशेष आयोजन, पहुंचीं आरती किशोरी
मधेपुरा के उदाकिशुनगंज स्थित फनहन गोठ बस्ती में आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। श्रीराम वृंदावन धाम से पधारीं पंडित आरती किशोरी ...और पढ़ें

मधेपुरा के उदाकिशुनगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 10 स्थित फनहन गोठ बस्ती में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सुनातीं आरती किशोरी।
HighLights
मधेपुरा में आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा शुरू।
पंडित आरती किशोरी ने कथा का वाचन किया।
कथा से आत्मबोध और सकारात्मक ऊर्जा का संचार।
संवाद सूत्र, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)। मधेपुरा के उदाकिशुनगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 10 स्थित फनहन गोठ बस्ती में मंगलवार से आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
कथा के प्रथम दिन भागवत महात्म्य, भक्त चरित्र और सुंदर भजन प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उत्तर प्रदेश के श्रीराम वृंदावन धाम से पधारीं कथावाचक पंडित आरती किशोरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मात्र से ही मनुष्य का जीवन सार्थक हो जाता है। यह कथा व्यक्ति को आत्मबोध कराती है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म लेकर अपने सद्कर्मों को भूल जाता है। बाल्यावस्था से लेकर मृत्यु तक मनुष्य सांसारिक सुख-सुविधाओं और क्षणिक भोग-विलास में उलझकर अमूल्य मानव जीवन को नश्वर बना देता है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट करती है, इसलिए जहां भी भागवत कथा का आयोजन हो, वहां श्रद्धापूर्वक उसका श्रवण अवश्य करना चाहिए। इससे न केवल व्यक्ति, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियां समाप्त होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार मानव जीवन के उद्धार के लिए हुआ। कंस ने उनके जन्म को रोकने के लिए अनेक प्रयास किए, लेकिन अंततः अपने पापों का घड़ा भर जाने पर वह श्रीकृष्ण के हाथों मारा गया और मोक्ष को प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि मानव जीवन सबसे श्रेष्ठ योनि मानी गई है। इसी योनि में जन्म लेकर मनुष्य ईश्वर की भक्ति कर सकता है, यही कारण है कि देवता भी मानव जन्म की कामना करते हैं।
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पंडित आरती किशोरी ने बताया कि श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से सदाचार और दुराचार के बीच अंतर स्पष्ट किया। ईश्वर को धन, वैभव या बड़े-बड़े यज्ञों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वह केवल स्वच्छ और पवित्र मन से की गई भक्ति से प्रसन्न होते हैं। भगवान जाति, पंथ या धर्म नहीं देखते, वे केवल भक्त के प्रेम और समर्पण को स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य किसी वस्तु या विचार के महत्व को नहीं समझता, तब तक उसके प्रति श्रद्धा उत्पन्न नहीं होती। इसी प्रकार जब तक भक्त का मन पवित्र नहीं होता, तब तक भागवत कथा श्रवण का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो सकता। कथा के दौरान प्रस्तुत भजन-संगीत पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होते रहे। संध्या बेला में आरती के साथ प्रथम दिन की कथा का समापन हुआ।
इस अवसर पर आयोजन समिति के विजय प्रसाद सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, रामबालक सिंह, भीमशंकर पासवान, शिवनंदन यादव, रामानंद यादव, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि कुंदन पासवान, अमर आशीष, गौरव कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।