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    मधेपुरा: मुआवजा विवाद में अटका सिंहेश्वर पुल का एप्रोच पथ निर्माण, भू-स्वामी ने बांस-बल्ली गाड़कर रोका काम

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 02:18 AM (IST)

    सिंहेश्वर के सुखासन पंचायत में परवाने नदी पर बने 7 करोड़ के पुल का एप्रोच पथ भूमि विवाद के कारण अटका हुआ है। मुआवजे की मांग को लेकर भू-स्वामी ने निर्म ...और पढ़ें

    एप्रोच पथ पर गड़ी बास की बल्ली। फोटो जागरण

    एप्रोच पथ पर गड़ी बास की बल्ली। फोटो जागरण

    HighLights

    1. सुखासन पंचायत में पुल का एप्रोच पथ रुका।

    2. भूमि विवाद और मुआवजे की मांग मुख्य कारण।

    3. दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी।

    संवाद सूत्र, सिंहेश्वर(मधेपुरा)। सिंहेश्वर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सुखासन पंचायत में परवाने नदी पर करीब सात करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल का एप्रोच पथ का निर्माण अटक गया है।

    भूमि विवाद के कारण पुल तक पहुंचने वाले मार्ग का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

    जानकारी के अनुसार, परवाने नदी पर पुल का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। पुल के दोनों ओर लगभग 200 मीटर लंबा एप्रोच पथ बनाया जाना है। विभाग की ओर से निर्माण कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन गौरीपुर निवासी भू-स्वामी विजय कुमार द्वारा जमीन पर दावा जताते हुए बांस-बल्ली से घेरकर कार्य का विरोध किया।

    साथ ही कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद निर्माण एजेंसी ने काम बंद कर दिया। इसके बाद से एप्रोच पथ का निर्माण अधर में लटका हुआ है। 

    भूमि स्वामी विजय कुमार का कहना है कि उनकी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है और न ही उन्हें उचित मुआवजा मिला है। उन्होंने जमीन को बांस-बल्ला लगाकर घेर दिया है और जिला प्रशासन से जमीन की मापी कराकर नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है। मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा सकता है।

    लोगों को आवागमन में परेशानी

    एप्रोच पथ नहीं बनने से नारियल विकास बोर्ड, नवोदय विद्यालय, सुखासन, लक्ष्मीनियां, बराही हसनपुर, इटहरी, पंचगछिया, बैजनाथपुर समेत कई गांवों के लोगों के साथ-साथ घैलाढ़ प्रखंड के ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    पुल तैयार रहने के बावजूद भारी वाहनों का परिचालन संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लोगों को पुराने स्क्रू पाइल लोहे के पुल का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां दोनों ओर लगाए गए लोहे के बैरियर के कारण मुख्य रूप से पैदल यात्री और दोपहिया वाहन ही गुजर पा रहे हैं।

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    स्थानीय ग्रामीण तनिक चौधरी, अमित जायसवाल, रुदल यादव, सुनील यादव, गोपाल यादव एवं अन्य लोगों ने बताया कि यदि जल्द एप्रोच पथ का निर्माण पूरा नहीं कराया गया तो बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    वर्तमान में भारी वाहनों को साहुगढ़ अथवा लालपट्टी-सतौखर मार्ग होकर करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

    ग्रामीणों ने यह भी बताया कि एप्रोच पथ निर्माण में हो रही देरी के कारण पुराने लोहे के पुल पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भारी वाहनों के भार से पुराना पुल और कमजोर हो सकता है, जिससे क्षेत्र की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

    ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से भूमि विवाद का शीघ्र समाधान कर एप्रोच पथ निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल का लाभ आम लोगों को मिल सके।

    इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। संबंधित विभाग से जानकारी प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - ज्योति गामी, बीडीओ, सिंहेश्वर।

    पुल के एप्रोच पथ का कार्य रोके जाने की जानकारी मिली है। वरीय अधिकारियों के द्वारा नापी करवाने का आदेश दिया गया है। जल्द ही नापी करवाया जाएगा। - नवीन कुमार सिंह, अंचलाधिकारी, सिंहेश्वर।