मधुबनी में 1.77 लाख लोगों की टीबी जांच में 2947 मरीज मिले, 14 अगस्त तक चलेगा अभियान
मधुबनी में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 1.77 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग में 2,947 संभावित टीबी मरीज मिले हैं। अब 14 अगस्त तक 279 गांवों में उच्च ...और पढ़ें

HighLights
1.77 लाख से अधिक लोगों की टीबी स्क्रीनिंग हुई।
2,947 संभावित टीबी मरीजों की पहचान की गई।
14 अगस्त तक 279 गांवों में विशेष स्क्रीनिंग जारी।
जागरण संवाददाता, मधुबनी। Madhubani TB Screening: जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत चल रही स्क्रीनिंग में अब तक 1.77 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। इनमें 2,947 संभावित टीबी मरीजों की पहचान हुई है।
अब जिले के 279 गांवों में 14 अगस्त तक उच्च जोखिम वाली आबादी की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी। अभियान को मिशन मोड में संचालित करने के लिए बिहार सरकार ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
279 गांवों में चलेगा विशेष स्क्रीनिंग अभियान
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. जीएम ठाकुर ने बताया कि 13 जुलाई तक जिले में 1,76,935 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 2,947 संभावित टीबी मरीज मिले हैं। इन मरीजों की पुष्टि सीबीएनएएटी (CBNAAT) और ट्रूनैट (TruNat) जांच के माध्यम से की जाएगी। अभियान के दौरान स्क्रीनिंग, एक्स-रे, जांच, उपचार और निक्षय पोर्टल पर रियल टाइम प्रविष्टि पर विशेष जोर रहेगा।
उच्च जोखिम वाले समूहों की प्राथमिकता
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अर्बन स्लम, महादलित टोला, अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावास, जेल, वृद्धाश्रम, अनाथालय, जुवेनाइल होम, गंभीर कुपोषित बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, मधुमेह और एचआईवी संक्रमित मरीजों समेत अन्य उच्च जोखिम वाले समूहों की प्राथमिकता के आधार पर टीबी जांच की जाएगी। इसके लिए सभी प्रखंडों में माइक्रोप्लान तैयार कर विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
एआई आधारित एक्स रे मशीनों से जांच
अभियान के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में अल्ट्रा पोर्टेबल हैंडहेल्ड एआई आधारित एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक मशीन से प्रतिदिन करीब 100 एक्स-रे करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। संदिग्ध मरीजों की पुष्टि सीबीएनएएटी और ट्रूनैट जांच से होगी तथा सभी रिपोर्ट निक्षय पोर्टल पर रियल टाइम अपलोड करना अनिवार्य रहेगा।
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परिवार के सदस्यों की भी होगी जांच
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि पल्मोनरी टीबी मरीजों के परिवार के सभी सदस्यों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। जिनमें सक्रिय टीबी नहीं मिलेगी, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट दिया जाएगा। साथ ही मरीजों और उनके परिजनों के स्मार्टफोन में 'खुशी ई-संगिनी चैटबॉट' ऐप इंस्टॉल कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उपचार और पोषण सहायता पर फोकस
राज्य सरकार ने अभियान के दौरान निक्षय पोर्टल पर प्रत्येक गतिविधि की रियल टाइम प्रविष्टि अनिवार्य की है। प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट अगले दिन सुबह 10 बजे तक जिला संचारी रोग पदाधिकारी को भेजनी होगी।
सरकार का लक्ष्य केवल टीबी मरीजों की पहचान करना नहीं, बल्कि समय पर जांच, उपचार, पोषण सहायता, प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट और सामुदायिक भागीदारी के जरिए बिहार को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है।