गोदना पेंटिंग से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं मधुबनी की सुशीला, कैनवास पर उकेरी राजा सलहेस की गाथा
King Salhesh Mithila Art: मधुबनी की दलित कलाकार सुशीला देवी गोदना पेंटिंग के जरिए लोकदेवता राजा सलहेस की पौराणिक गाथा को कैनवास पर जीवंत कर रही हैं। उ ...और पढ़ें

सुशीला देवी। फोटो सौ: स्वजन
राजेश रंजन शशि, मधुबनी। Godna Painting Sushila Devi: बिहार के पहले शिल्पग्राम जितवारपुर की रहने वाली दलित कलाकार सुशीला देवी गोदना पेंटिंग के जरिए नई मिसाल पेश कर रही हैं।
वे अपनी कला से लोकदेवता राजा सलहेस की पौराणिक गाथा को कैनवास पर जीवंत रख रही हैं। गोदना चित्रकला के जरिए उन्होंने हजारों महिलाओं को जोड़कर आर्थिक स्वतंत्रता और रचनात्मक उद्यमिता का मार्ग दिखाया है।
चार दशकों का सफर
सुशीला देवी लगभग चार दशकों से लुप्तप्राय हो रही इस लोकगाथा और चित्रकला परंपरा की थाती संभाल रही हैं। उनकी उत्कृष्ट कलात्मक देन को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के तारा बुक्स पब्लिकेशन ने अपनी पुस्तक में उन्हें विशेष स्थान दिया है।
शुरुआती दिनों में उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता स्व. चानो देवी के साथ देशभर में यात्राएं कर इस शैली को सहेजा।
प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल
उनकी इस विशेष चित्रकला को आईजीआरएमएस भोपाल, आईटीएम ग्वालियर और हैदराबाद विश्वविद्यालय सहित कई शीर्ष संस्थानों ने सम्मानित किया है।उन्हें अब तक देश के विभिन्न मंचों से डेढ़ दर्जनों से अधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।
उनकी पेंटिंग्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल फूल-पत्तियों और घरेलू चीजों से बने प्राकृतिक रंगों का प्रयोग होता है।
राजा सलहेस मुख्य थीम
सुशीला देवी की बनाई गोदना पेंटिंग्स में पारंपरिक देवी-देवताओं के साथ-साथ लोकनायक राजा सलहेस मुख्य थीम के रूप में दर्ज रहते हैं। इसके अलावा वे अपनी कला में प्रकृति, स्थानीय जीवन, कछुए, मछलियां, सांप और मोर जैसे जीव-जंतुओं का सुंदर संयोजन करती हैं।
1980 के दशक में जितवारपुर निवासी नेवा लाल पासवान से विवाह के बाद उन्होंने अपनी सास से यह पारंपरिक विधा सीखी थी।