मधुबनी में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में जांच किट और दवाओं की व्यवस्था
Bihar Health Department: मधुबनी में मानसून के साथ डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। अस्पतालों में जांच, उपचार और निगरानी व ...और पढ़ें

संभावित संक्रमित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मधुबनी। Madhubani Dengue Alert: मानसून के आगमन के साथ डेंगू संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए मधुबनी जिला स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है।
राज्य स्तर से जारी निर्देशों के बाद जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में जांच, उपचार और निगरानी की व्यवस्था सुदृढ़ कर दी गई है। आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य कर्मियों को भी सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।
दवाइयों और प्लेटलेट्स की उपलब्धता
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, बिहार के निर्देश के अनुसार सरकारी अस्पतालों में डेंगू जांच किट, आवश्यक दवाइयां, मच्छरदानी युक्त बेड तथा जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए अस्पतालों को पहले से तैयार रहने को कहा गया है।
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप सभी निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया जा रहा है।
रैपिड रिस्पांस टीम रहेगी सक्रिय
संक्रमण के किसी भी मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिले में रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) को सक्रिय रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने तथा संभावित संक्रमित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य चुनौतियों की भी तैयारी
स्वास्थ्य विभाग ने संभावित बाढ़ और सूखे की स्थिति को देखते हुए भी विशेष कार्ययोजना तैयार की है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलजनित रोग, दस्त, आंत्र ज्वर, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम और उपचार के लिए पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
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सूखा प्रभावित इलाकों में श्वसन संबंधी रोग, कुपोषण और त्वचा रोग की आशंका को देखते हुए भी विशेष चिकित्सकीय व्यवस्था की जाएगी। सांप और कुत्ते के काटने की घटनाओं से निपटने के लिए भी आवश्यक दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
बनेगी वैकल्पिक व्यवस्था
विभाग ने ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान करने का निर्देश दिया है, जो हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इन केंद्रों के लिए पहले से सुरक्षित और वैकल्पिक स्थान चिन्हित किए जाएंगे, ताकि बाढ़ के दौरान भी स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रह सकें।