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    मधुबनी में डॉक्टरों की हड़ताल से ठप हुई ओपीडी, हजारों मरीज इलाज से हुए वंचित

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 05:00 PM (GMT+05:30)

    मधुबनी में अरवल सिविल सर्जन पर हमले के विरोध में डॉक्टरों की हड़ताल से ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं। लगभग पांच हजार मरीज इलाज से वंचित रहे, जिससे उन्हें भा ...और पढ़ें

    सदर अस्पताल के ओपीडी के बाहर सिविल सर्जन के साथ ओपीडी का बहिष्कार करते हर विभाग के डॉक्टर। जागरण

    सदर अस्पताल के ओपीडी के बाहर सिविल सर्जन के साथ ओपीडी का बहिष्कार करते हर विभाग के डॉक्टर। जागरण

    HighLights

    1. अरवल घटना के विरोध में डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया।

    2. मधुबनी में करीब 5000 मरीज इलाज से वंचित रहे।

    3. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने सुरक्षा की मांग की।

    जागरण संवाददाता, मधुबनी। अरवल सदर अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद सिविल सर्जन पर हुए हमले के विरोध में बुधवार को सदर अस्पताल सहित तमाम अनुमंडलीय अस्पतालों, सीएचसी एवं पीएचसी में ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं।

    इस दौरान करीब पांच हजार मरीजों का ओपीडी में निबंधन व इलाज नहीं हो सका। ओपीडी बहिष्कार से कई लाचार व बेबस मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।

    ओपीडी खोलने के साथ रजिस्ट्रेशन काउंटर पर सिर्फ चार मरीजों का निबंध हुआ। इतने में डॉक्टर लोग वहां पहुंच गए और विरोध जताने लगे। जिन चार लोगों की निबंधन की पर्ची कटी इनमें दो गायनिक और दो फिजियोथेरेपी के मरीज थे। इसके बाद मरीज का निबंध बंद करा दिया गया।

    कजियाना के सुनील यादव का पैर टूटा था, ओपीडी बहिष्कार की जानकारी नहीं थी। ओपीडी के डॉक्टर ने आज का समय दिया था। 10:30 बजे पहुंचे मगर उनका निबंध नहीं हो सका। करीब डेढ़ घंटे इंतजार के बाद वापस लौटे। कहा जाने -आने में करीब 400 रुपए खर्च हो गए।

    बेल्हवार के डोमा पासवान के दोनों पैर में सूजन था, मगर ओपीडी बंद रहने की वजह से इलाज नहीं करवा सके। साथ में उनकी बहू भी पहुंची थी जिन्हें गायनिक वार्ड में दिखाना था। वहीं शहर की नवनीता कुमारी खुद को हड्डी विभाग में दिखने पहुंची थी।

    निबंध काउंटर तक पहुंचाने के बाद भी उनका निबंध इस वजह से नहीं हो सका की सभी डॉक्टर ओपीडी का बहिष्कार कर धरना पर बैठ गए थे।

    सदर अस्पताल के ओपीडी भवन गेट पर घटना के विरोध में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, डॉ. कुणाल कौशल, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. सुमन कुमार, डॉ. डीके झा, डॉ. कुणाल शंकर, डॉ. विकास मदन, डॉ. श्रवण कुमार, डॉ. आशिक रेजा, डॉ. अरविंद यादव, डॉ. रागिनी, डॉ. महारानी, डॉ. जाकिर, डॉ. के. झा, डॉ. शहजाद, डॉ. फैजुल हसन, डॉ. सितांशु, डॉ. मिनी सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद थे।

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    अरवल की घटना पर आंदोलित थे डॉक्टर

    मधुबनी सदर अस्पताल अरवल में प्रसूता की मौत के बाद सिविल सर्जन पर हुए हमले की बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कड़ी निंदा की है।

    संघ के राज्य उपाध्यक्ष सह जिला सचिव डॉ कुणाल कौशल ने बताया कि सिविल सर्जन एवं चिकित्सकों पर हुए हमले के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कड़ा रुख अपनाया है।

    संघ ने घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय एवं स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

    चिकित्सकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

    बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कहा कि अस्पतालों में लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाएं चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल कमजोर कर रही हैं।

    भय के माहौल में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना कठिन हो जाता है। चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल स्वास्थ्यकर्मियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज और मरीजों के हित में आवश्यक है।

    संघ ने सरकार के समक्ष रखीं चार प्रमुख मांगें

    संघ ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि घटना में शामिल सभी आरोपितों की पहचान कर तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।

    सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा अस्पतालों में हिंसक घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल और त्वरित पुलिस हस्तक्षेप की व्यवस्था लागू की जाए।