Madhubani News : यहां स्कूल जाना भी जोखिम, जर्जर भवन और पोखर किनारे बरामदे में पढ़ने को मजबूर बच्चे
मधुबनी के मध्य विद्यालय सप्ता शहरी में 324 छात्र-छात्राएं जर्जर भवन, बरामदे और पोखर किनारे पढ़ने को मजबूर हैं, जिससे उनकी शिक्षा और सुरक्षा दोनों खतरे ...और पढ़ें

स्कूल के बरामदे में पढ़ाई करते बच्चे।
HighLights
324 छात्र जर्जर भवन, बरामदे, पोखर किनारे पढ़ने को मजबूर।
विद्यालय के 6 में से 3 कमरे पूरी तरह जर्जर, असुरक्षित।
नए भवन निर्माण और अतिक्रमण हटाने की मांग की गई।
जागरण संवाददाता, मधुबनी। शहर के ऐतिहासिक मध्य विद्यालय सप्ता शहरी की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है। यहां 324 छात्र-छात्राएं जर्जर भवन, बरामदे और पोखर के किनारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय में कुल छह कमरे हैं, जिनमें से तीन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद, बच्चों की कक्षाएं इन्हीं कमरों में संचालित हो रही हैं।
विशेष रूप से, कक्षा छह का एस्बेस्टस वाला कमरा अत्यंत खतरनाक स्थिति में है, फिर भी इसे पढ़ाई के लिए उपयोग किया जा रहा है।
विद्यालय में 132 छात्र और 192 छात्राएं नामांकित हैं, जिनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी 10 शिक्षकों और एक प्रधानाध्यापक पर है।
कमरों की कमी के कारण कक्षा एक और दो की पढ़ाई बरामदे में कराई जाती है, जबकि एक कक्षा पोखर के समीप खुले स्थान पर संचालित होती है। बरसात के मौसम में बच्चों और शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय समाजसेवी राजा ठाकुर ने बताया कि विद्यालय भवन के निर्माण के लिए शिक्षा विभाग के निदेशक से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
इसके अलावा, विद्यालय की भूमि भी अतिक्रमण की चपेट में है। वर्ष 1994 में तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने विद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण की जानकारी दी थी, लेकिन आज तक इसे हटाया नहीं जा सका है।
विद्यालय शिक्षा समिति की अध्यक्ष और वार्ड पार्षद स्वाति कुमारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दोनों पर संकट है।
जर्जर भवन में पढ़ाई कराना मजबूरी बन गई है। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अविलंब कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस स्थिति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिल सके।