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    बिहार के सरकारी स्कूल बन गए पुलिस कैंप, परीक्षा से वंचित हुए हजारों छात्र

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 11:42 PM (IST)

    मधुबनी में सरकारी स्कूल पुलिस कैंप में बदल गए हैं, जिससे हजारों छात्र त्रैमासिक परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं और उनकी पढ़ाई ठप है। प्रशासन के अधिग्रहण से ...और पढ़ें

    सरकारी स्कूल बने पुलिस कैंप। फोटो जागरण

    सरकारी स्कूल बने पुलिस कैंप। फोटो जागरण

    HighLights

    1. मधुबनी के स्कूल पुलिस कैंप बनने से पढ़ाई ठप।

    2. हजारों छात्र त्रैमासिक परीक्षा देने से वंचित हुए।

    3. प्रशासन के अधिग्रहण से छात्रों का भविष्य खतरे में।

    जागरण संवाददाता, मधुबनी। पूरे बिहार में जहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं त्रैमासिक परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, वहीं जिले के रहिका प्रखंड स्थित महंत युगल नारायण प्लस टू उच्च विद्यालय, शंभुआर के करीब एक हजार छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। विद्यालय परिसर में प्रशिक्षु पुलिस बल के ठहराव के कारण 29 जून से पठन-पाठन पूरी तरह ठप है और छात्र-छात्राएं परीक्षा तक नहीं दे पा रहे हैं।

    सबसे गंभीर बात यह है कि कई स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद अब तक प्रशासन कोई समाधान नहीं निकाल सका है। विद्यालय के दसों कमरों पर नवनियुक्त सिपाही रह रहे हैं। ऐसे में कक्षा 9, 10, 11 एवं 12 की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो गई है।

    राज्य सरकार की एक जुलाई से शुरू त्रैमासिक परीक्षा में इस विद्यालय के विद्यार्थी शामिल नहीं हो सके। चार दिनों में कई महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं, जबकि परीक्षा सात जुलाई तक चलनी है।

    मामला सिर्फ एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय गंगासागर भौआड़ा, मध्य विद्यालय लक्ष्मी सागर और राजकीयकृत मध्य विद्यालय भिठ्ठी में भी महिला सिपाहियों के ठहराव से नियमित पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। बच्चे फर्श और पेड़ के नीचे पढ़ने को विवश हैं।

    प्रशासन ने नहीं निकाला समाधान

    प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय के सभी दस कमरे पुलिस बल के कब्जे में हैं। 26 शिक्षक रहते हुए भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों और शिक्षा मंत्री तक को पत्र भेजा, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। बच्चों की परीक्षा छूट रही है और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

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    बता दें कि 15 जून को पुलिस अधीक्षक ने 494 प्रशिक्षु सिपाहियों के ठहराव के लिए विद्यालय अधिग्रहण का प्रस्ताव डीएम को भेजा था। इसके बाद 17 जून को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पत्रांक 2887 के माध्यम से चार विद्यालयों के अधिग्रहण का आदेश जारी किया।

    प्रशिक्षण अवधि तक के लिये अधिग्रहण किया गया है। प्रशिक्षण की अंतिम तारीख तय नहीं है। मगर कुछ सिपाहियों का कहना था कि कम से कम अभी डेढ़-दो माह रहेंगे।

    विद्यालय शिक्षा के लिए होता है, पुलिस कैंप बनाने के लिए नहीं। प्रशासन ने हजारों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं बदली गई तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे। - बैद्यनाथ सिंह, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य

    सरकार शिक्षा सुधार की बात करती है, लेकिन यहां बच्चों को परीक्षा से ही वंचित कर दिया गया। प्रशासन की संवेदनहीनता का खामियाजा मासूम छात्र भुगत रहे हैं। -विश्वजीत कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, ग्रामीण

    हमारे बच्चों ने महीनों तैयारी की थी, लेकिन अब परीक्षा ही नहीं दे पा रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन होगा। स्कूल प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। -सुनील यादव, अभिभावक

    यदि स्कूलों में पुलिस ही रहेगी तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। जिससे छात्रों को पढ़ाई वंचित नहीं हो। -चंद्र किशोर सिंह , अभिभावक

    हम पूरे साल परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन बिना किसी गलती के हमें परीक्षा से वंचित कर दिया गया। इससे हमारे भविष्य पर असर पड़ेगा। -दीक्षा कुमारी, 12वीं की छात्रा

    हर दिन स्कूल जाते हैं, लेकिन पढ़ाई नहीं होती। परीक्षा छूट जाने से हम मानसिक तनाव में हैं।
    आयुषी कुमारी, 10वीं की छात्रा

    हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। दूसरे स्कूलों में परीक्षा हो रही है और हम घर बैठने को मजबूर हैं।
    संगीता कुमारी, छात्रा

    हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द पुलिस कैंप हटे और हमारी छूटी हुई परीक्षा कराई जाए।
    रीतिका कुमारी, छात्रा

    उधर, राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय गंगासागर भौआड़ा के प्रधानाध्यापक संजीव ठाकुर ने बताया कि विद्यालय में 106 बच्चे नामांकित हैं। तीन कमरों में से दो कमरों पर महिला सिपाहियों का कब्जा है। मजबूरी में बच्चों को फर्श और पेड़ के नीचे पढ़ाया जा रहा है।

    मध्य विद्यालय लक्ष्मी सागर के प्रधानाध्यापक तिरपित पासवान ने बताया कि विद्यालय में 500 छात्र नामांकित हैं। कुल 11 कमरों में से नौ कमरों को महिला सिपाहियों के ठहराव के लिए अधिग्रहित कर लिया गया है, जिससे शैक्षणिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हैं।

    राजकीयकृत मध्य विद्यालय भिठ्ठी की प्रधानाध्यापिका भारती कुमारी ने कहा कि विद्यालय के चारों कमरे अधिग्रहित कर लिए गए हैं। इससे नियमित कक्षाएं संचालित करना लगभग असंभव हो गया है।

    पुलिस प्रशिक्षण की आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर विद्यालयों का अधिग्रहण किया गया है। शंभुआर विद्यालय में परीक्षा संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा बच्चों की परीक्षा सुनिश्चित करने का प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया था। परीक्षा नहीं ली गई है तो प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की जाएगी। -अक्षय कुमार पांडेय, जिला शिक्षा पदाधिकारी