मधुबनी में फिटनेस चालान बंद, 10 हजार कमर्शियल वाहन मालिकों को अब लगानी होगी दरभंगा की दौड़
मधुबनी के 10 हजार व्यावसायिक वाहन मालिकों को अब फिटनेस के लिए दरभंगा जाना होगा, क्योंकि जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) नहीं है। ...और पढ़ें

मधुबनी के वाहन मालिकों की बढ़ी चिंता फिटनेस के लिए अब दरभंगा जाना अनिवार्य (AI Generated Image)
HighLights
मधुबनी में व्यावसायिक वाहनों का फिटनेस बंद हुआ।
अब फिटनेस के लिए दरभंगा एटीएस जाना होगा।
हजारों वाहन मालिकों को भारी परेशानी का सामना।
राजेश रंजन शशि, मधुबनी। जिले के 10 हजार कमर्शियल वाहन मालिकों को अपने वाहन का फिटनेस कराने के लिए अब दरभंगा जाना होगा। अब यहां से फिटनेस चालान कटना बंद हो गया है। दो दिन पहले तक फिटनेस चालान ऑनलाइन कटा है, पर अब ऐसे में सैकड़ों कमर्शियल वाहन मालिक परेशान हैं।
दर्जनों ऐसे कमर्शियल वाहन मालिक प्रत्येक दिन अपनी गाड़ी का फिटनेस बनवाने के लिए जिला परिवहन कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, मगर कार्यालय में विभागीय कर्मी और पदाधिकारियों से कोई अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के माध्यम से वाहनों का फिटनेस शुरू किया गया है, मगर मधुबनी में इसकी कोई शाखा नहीं है। ऐसे में दरभंगा के सोनकी स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में ही जाकर फिटनेस लेना होगा।
15 वर्ष की अवधि में करीब 10 हजार कमर्शियल वाहनों का मधुबनी कार्यालय से निबंधन हुआ है। हर दो वर्ष पर इन वाहनों का जुर्माना से बचने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। जिले में करीब 700 से 800 कमर्शियल ट्रैक्टर का परिचालन हो रहा है।
कई ऐसे व्यावसायिक ट्रैक्टर वाहन मालिक हैं जिनका फिटनेस या तो फेल होने के कगार पर है या कुछ दिनों में फेल होने वाला है। ऐसे वाहनों के फिटनेस के लिए किसानों को खेती किसानी छोड़कर ट्रैक्टर को दरभंगा ले जाने की मजबूरी हो रही है।
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स्कूल बस संचालकों की बढ़ी परेशानी:
जिले में करीब 200 से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। कई नामी-गिरामी स्कूलों के पास 10 से 20 स्कूली बसें हैं। इसके अलावा हर स्कूल के पास दो -चार बसें हैं। इस तरह कुल मिलकर 400 बसें और छोटी वाहनें हैं। इन तमाम स्कूलों के संचालकों की परेशानी बढ़ गई है।
हर दो वर्षों में फिटनेस के लिए दरभंगा जाना आसान नहीं होगा। सभी वाहनों की खरीद अलग-अलग समय पर होने से सालों भर दरभंगा एटीएस सेंटर पर जाना-आना लगा रहेगा।
खासकर जयनगर, फुलपरास, झंझारपुर, लौकहा, लौकही, बाबूबरही, मधवापुर, बेनीपट्टी, हरलाखी आदि जगहों से वाहन लेकर जाने में दिनभर का समय तो लगेगा ही अगर कोई त्रुटि रहती है तो उसे मानक अनुसार करने में रात भी बितानी पर सकती है।
किसानों की भी बढ़ी परेशानी:
डीटीओ ऑफिस पर पहुंचे ट्रैक्टर मालिक उपेंद्र मंडल, कृष्ण तिवारी आदि ने बताया कि जितना खर्च फिटनेस बनाने में नहीं होगा उससे अधिक इन वाहनों को लाने ले जाने के दौरान फ्यूल में खर्च हो जाएगा।
इन मालिकों का कहना है कि जिले में जबतक एटीएस की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती है तब तक जिला परिवहन कार्यालय मधुबनी को फिटनेस प्रमाण पत्र निर्गत करने का दिशा निर्देश मिलता तो सहूलियत होती।
वहीं, जिले के इन लोगों का कहना है कि सरकार कोई भी विभागीय योजना आम लोगों की सहूलियत के लिए बनाती है, मगर यहां पर फिटनेस प्रमाण पत्र जिला में नहीं बनने की वजह से हजारों वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ गई है।
विभागीय उदासीनता की वजह से अधिकतर व्यावसायिक वाहन मालिक अपना फिटनेस नहीं बना पा रहे हैं जिस वजह से उन्हें भविष्य में जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
मधुबनी जिला परिवहन कार्यालय से कमर्शियल वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र बंद कर दिया गया है। इसके लिए अब वाहन मालिकों को ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) जाना पड़ेगा। फिलहाल नजदीक में दरभंगा के सोनकी में एटीएस खोला गया है। सभी वाहन मालिक वहां पर जाकर अपने वाहनों का फिटनेस करवा सकते हैं। - राम बाबू, जिला परिवहन कार्यालय, मधुबनी