हाय रे मजबूरी: मधुबनी के युवक की तेलंगाना में मौत, आर्थिक तंगी में चल रहे माता-पिता ने शव लाने से किया इनकार
Telangana Train Accident: मधुबनी के सुखेत गांव के 36 वर्षीय युवक की हैदराबाद में ट्रेन से गिरकर मौत हो गई। आर्थिक तंगी और शारीरिक अक्षमता के कारण उसके ...और पढ़ें

इस खबर में प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
हैदराबाद में मधुबनी के युवक की ट्रेन से मौत।
आर्थिक तंगी के कारण माता-पिता ने शव लेने से मना किया।
पुलिस सहयोग के बावजूद परिवार ने असमर्थता जताई।
संवाद सहयोगी, झंझारपुर (मधुबनी)। जिले के झंझारपुर क्षेत्र से जुड़ी एक बेहद मार्मिक घटना सामने आई है, जहां तेलंगाना में एक युवक की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई, लेकिन आर्थिक तंगी और शारीरिक लाचारी के कारण उसके माता-पिता शव लेने से इनकार कर रहे हैं।
ट्रेन से गिरकर हुई मौत
घटना 18 अप्रैल को तेलंगाना के लिंगमपल्ली-हैदराबाद रेलखंड पर हुई, जहां सुखेत गांव निवासी 36 वर्षीय अर्जुन चौधरी की सवारी ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई।
पहचान में हुई देरी
मौत से पहले युवक ने अपना पता केवल झंझारपुर बताया था, जिसके कारण उसकी पहचान तुरंत नहीं हो सकी। आरपीएफ हैदराबाद की ओर से जारी सूचना बाद में झंझारपुर पहुंची, जिसके बाद पहचान संभव हो पाई।
परिवार ने जताई असमर्थता
स्थानीय पुलिस और आरपीएफ द्वारा संपर्क करने पर मृतक के 67 वर्षीय पिता बीरेन्द्र चौधरी और मां मीरा देवी ने आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए हैदराबाद जाकर शव लाने में असमर्थता जताई।
दिव्यांग पिता की मजबूरी
पिता बीरेन्द्र चौधरी ने बताया कि वे दिव्यांग हैं और मजदूरी के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे में इतनी दूर जाना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन शव को गांव पहुंचा दे तो ठीक, अन्यथा वे यहीं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
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पांच साल से नहीं था संपर्क
परिजनों के अनुसार, मृतक अर्जुन चौधरी पांच वर्ष पूर्व घर छोड़कर चला गया था और तब से परिवार से उसका कोई संपर्क नहीं था। उनका बड़ा बेटा दिल्ली में परिवार के साथ रहता है।
नियम अनुसार होगा अंतिम संस्कार
आरपीएफ हैदराबाद के अधिकारियों ने बताया कि यदि परिजन शव लेने नहीं आते हैं, तो निर्धारित समय के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
सामाजिक चर्चा का विषय बनी घटना
यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे बदलते सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों के संदर्भ में देख रहे हैं, जहां मजबूरी और हालात रिश्तों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।