मुंगेर में डॉक्टरों का जबरदस्त विरोध प्रदर्शन : अरवल में CS से मारपीट के खिलाफ OPD ठप, पर्ची कटाकर भटक रहे मरीज
मुंगेर में डॉक्टरों ने अरवल के सिविल सर्जन पर हुए हमले के विरोध में ओपीडी सेवाएं ठप कर दीं। इससे सदर अस्पताल में 200 से अधिक मरीजों को परेशानी हुई, हा ...और पढ़ें
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मुंगेर में हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप: ओपीडी बंद होने से भटके 200 मरीज, CS से मारपीट के विरोध में उतरे डॉक्टर
संवाद सहयोगी, मुंगेर। अरवल जिले के सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसक मारपीट की घटना के विरोध में बुधवार को मुंगेर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर गईं। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के आह्वान पर मुंगेर सदर अस्पताल के सभी डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा को पूरी तरह ठप रखा।
ओपीडी बंद होने से असमंजस
अस्पताल में ओपीडी बंद रहने की पूर्व सूचना न होने के कारण अलसुबह से ही पर्ची कटाने वाले निबंधन काउंटर पर मरीजों की भारी भीड़ और लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे असहाय मरीज और उनके परिजन रजिस्ट्रेशन पर्ची कटाने के बाद काफी देर तक डॉक्टरों के ओपीडी कक्ष के बाहर इंतजार करते रहे।
बैरंग लौटने को मजबूर मरीज
काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद जब ओपीडी में एक भी चिकित्सक इलाज के लिए नहीं पहुंचा, तो लाचार मरीज बिना डॉक्टरी सलाह लिए मायूस होकर घर लौटने को मजबूर हुए। इधर ओपीडी का पूर्ण बहिष्कार करने के बाद सभी आंदोलित चिकित्सक अस्पताल के उपाधीक्षक (DS) कार्यालय में एकत्र हुए और अरवल घटना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।

200 से अधिक मरीज परेशान
सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा अचानक ठप हो जाने से जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने आए 200 से अधिक गरीब मरीजों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी। सरकारी अस्पताल में इलाज न मिलने से हताश होकर दर्जनों मरीजों और उनके तीमारदारों को मजबूरन महंगे निजी क्लीनिकों और डॉक्टरों की ओर रुख करना पड़ा।
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इमरजेंसी सेवा रही चालू
हालांकि राहत की बात यह रही कि आम जनता की समस्याओं को देखते हुए अस्पताल की इमरजेंसी सेवा और पूर्व निर्धारित सभी महत्वपूर्ण ऑपरेशन सामान्य रूप से संचालित होते रहे। इमरजेंसी सेवा सुचारू रहने से दुर्घटनाग्रस्त, गंभीर रूप से बीमार और प्रसव संबंधी आपातकालीन स्थिति में आए मरीजों को समय पर तत्काल डॉक्टरी सहायता और इलाज मिल सका।
परिसर में नारेबाजी व प्रदर्शन
विरोध कार्यक्रम के दौरान डॉ. रमन, डॉ. निधि, डॉ. प्रमिला, डॉ. बी.एन. सिंह, डॉ. निरंजन, डॉ. रुपेश समेत दर्जनों वरिष्ठ चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल परिसर में मुस्तैद रहे। आंदोलित चिकित्सकों ने अरवल की घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि जब तक डॉक्टरों की कार्यस्थल पर पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक निर्भीक होकर काम करना असंभव है।
सरकार से सख्त कार्रवाई मांग
भासा के प्रतिनिधि डॉक्टरों ने मांग उठाई कि सिविल सर्जन से मारपीट करने वाले असामाजिक तत्वों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और अस्पतालों में पुलिस बल तैनात किया जाए। एक ओर जहां डॉक्टरों का गुस्सा जायज था, वहीं दूसरी ओर दूर-दराज से पैसा खर्च करके आए गरीब मरीजों ने भी बिना वैकल्पिक व्यवस्था के ओपीडी अचानक बंद करने पर अपनी नाराजगी जताई।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
सदर अस्पताल में उपजे इस गतिरोध और ओपीडी सेवा बाधित होने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी करते रहे।