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    मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन की जमीनी हकीकत: कहीं सड़क धंसी, कहीं पुल में दरार; गुणवत्ता पर उठे सवाल

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 06:41 PM (IST)

    मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहां कई स्थानों पर सड़क में दरारें और धंसाव पाया गया है। निर्माण एजेंसी द्वारा सीम ...और पढ़ें

    कहीं सड़क धंसी, कहीं पुल में दरार; गुणवत्ता पर उठे सवाल

    कहीं सड़क धंसी, कहीं पुल में दरार; गुणवत्ता पर उठे सवाल

    HighLights

    1. बेलहरनी नदी के पास सड़क में दरारें और धंसाव।

    2. 80 मीटर लंबे पुल के ढांचे में भी दरारें मिलीं।

    3. अस्थायी मरम्मत से निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल।

    हैदर/मनोज, मुंगेर। मुंगेर-मिर्जाचौकी के बीच करीब 125 किलोमीटर लंबाई में बन रहे फोरलेन की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। भागलपुर जिले के गनगनिया बेलहरनी नदी के पास लगभग 40 मीटर हिस्से में सड़क में दो इंच चौड़ी दरार मिलने के महज एक सप्ताह बाद दैनिक जागरण ने शुक्रवार को फोरलेन के शुरुआत तेलिया तालाब से घोरघाट तक पड़ताल की।

    जांच में जो तस्वीर सामने आई, उसने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। तेलिया तालाब से गनगनिया तक करीब 38 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में छह अलग-अलग स्थानों पर सड़क में दरारें मिलीं।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बेलहरनी नदी के समीप जहां तीन दिन पहले सड़क धंसने की घटना सामने आई थी, उसी स्थल के समीप 80 मीटर लंबे पुल के ढांचे में भी दरारें दिखाई दीं।

    कई जगह निर्माण एजेंसी दरारों को सीमेंट की चिप्पी लगाकर भरते दिखे। लेकिन, सवाल यह है कि क्या यह स्थायी समाधान है या केवल खामियों को छिपाने की कवायद है।

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    गंगनिया में सबसे गंभीर स्थिति

    बेलहरनी नदी के चैनल संख्या 195 और 196 के समीप एक सप्ताह पहले जिस स्थान पर लगभग 40 मीटर लंबी सड़क धंस गई थी, वहां शुक्रवार को भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं दिखा। सड़क के कई हिस्सों में मिट्टी बैठाव स्पष्ट नजर आया।

    इसी स्थल पर बेलहरनी नदी पर बने करीब 80 मीटर लंबे पुल में भी कई स्थानों पर दरारें दिखाई दीं। पुल के एप्रोच और किनारों पर भी क्रैक नजर आया।

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    पूर्व की तकनीकी जांच में सामने आया था कि संबंधित हिस्से में मिट्टी भराई का लेवल निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं किया गया था, जिस कारण सड़क पर दबाव बढ़ने के बाद बैठाव और दरार की स्थिति बनी। अब पुल में भी दरार मिलने से तकनीकी जांच की जरूरत और बढ़ गई है।

    पड़ताल में छह जगह खामियां

    जागरण टीम ने तेलिया तालाब से घोरघाट होते गनगनियां तक पूरे फोरलेन मार्ग का जायजा लिया। इस दौरान गनगनिया के अलावा रतनपुर में पुल के समीप डाउन साइड रोड में दो स्थानों पर दरार दिखी। जबकि घोरघाट पुल के पास तीन स्थानों पर सड़क की सतह पर दरारें मिलीं।

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    रतनपुर के समीप पुल के पास डाउन लाइन (मुंगेर-भागलपुर) की सड़क में लंबी दरार दिखाई दी। वहीं, घोरघाट पुल के पास तीन अलग-अलग स्थानों पर सड़क की सतह फटती नजर आई।

    कई जगह दरारें शुरुआती अवस्था में हैं, लेकिन समय रहते इनका स्थायी उपचार नहीं हुआ तो मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    सीमेंट का चिप्पी लगाकर मरम्मत, स्थाई समाधान नहीं

    कई स्थानों पर निर्माण एजेंसी के कर्मचारी दरारों में सीमेंट और विशेष मिश्रण भरते दिखे। दरारों पर पैचवर्क कर उन्हें समतल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दरार की वजह नीचे की परतों में बैठाव या भराई की कमजोरी है, तो केवल ऊपर से पैच लगाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। इसके लिए पूरी संरचना की तकनीकी जांच और आवश्यक होने पर संबंधित हिस्से का पुनर्निर्माण करना होगा।

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    गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

    फोरलेन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना में शुरुआती चरण में ही लगातार दरारें मिलने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल तेज हो गए हैं। सड़क निर्माण में सबग्रेड, मिट्टी की सघनता, जल निकासी और कंक्रीट की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    यदि इनमें कहीं भी मानकों से समझौता हुआ है तो भविष्य में सड़क और पुल दोनों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्घाटन से पहले ही सड़क में जगह-जगह दरारें दिखाई देना चिंता का विषय है।

    उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की परियोजना में केवल सतही मरम्मत के बजाय स्वतंत्र एजेंसी से गुणवत्ता की जांच कराई जानी चाहिए।

    एनएचएआई मुंगेर के परियोजना निदेशक मनीष कुमार ने बताया कि बेलहरनी नदी के समीप दरार वाले स्थल पर पैनल काट कर सड़क को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा जहां-जहां भी सड़क की सतह पर दरार हुए हैं, उसकी जांच कराई जा रही है।

    उन्होंने कहा कि दरार के कारणों का पता लगाया जा रहा है। उसी अनुरूप पुननिर्माण या मरम्मत का काम कराया जाएगा। फोरलेन अभी अंडरकंस्ट्रक्शन है, ऐसे में जहां भी दरार या धंसने की समस्या आएगी, निर्माण कर रही एजेंसी से पुननिर्माण काम कराया जाएगा।

    मनीष कुमार ने बताया कि नई सड़क में भरी गई मिट्टी वर्षा होने पर पानी अंदर जाने से मिट्टी धंसने के कारण सड़क पर दरार की समस्या उत्पन्न हो रही है। फोरलेन पर किनारे स्लोप प्रोटेक्शन कहीं नहीं है। सड़क किनारे पत्थर बोल्डर के गाइडवाल का प्राविधान नहीं है। फोरलेन किनारे स्लोप प्रोटेक्शन के लिए कृत्रिम घास सहित अलग-अलग प्राविधान है।

    उन्होंने कहा कि तीन मीटर, छह मीटर, और उससे उंची सड़क किनारे स्लोप प्रोटेक्शन के लिए अलग अलग लगाए जाने का नियम है। उसी अनुरूप स्लोप प्रोटेक्शन का काम कराया जाएगा, ताकि वर्षा में सड़क किनारे की मिट्टी नहीं कटे।