मुंगेर NH-80 पर बारिश से भारी तबाही; तेलिया तालाब से बरियारपुर तक 13 KM लंबा जाम, रातभर फंसे रहे कांवड़िया वाहन
मुंगेर में NH-80 पर मूसलाधार बारिश के कारण तेलिया तालाब से बरियारपुर तक 13 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया, जिससे कांवड़िया वाहन और यात्री रातभर फंसे रह ...और पढ़ें

मूसलाधार वर्षा से सड़क किनारे कीचड़ और मिट्टी कटाव बना मुसीबत; रात 2:30 बजे से सुबह 8 बजे तक रेंगते रहे सैकड़ों वाहन
HighLights
NH-80 पर 13 किमी लंबा भीषण जाम।
कांवड़िया वाहन और यात्री रातभर फंसे रहे।
कीचड़ और मिट्टी कटाव से यातायात बाधित।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। मुंगेर-भागलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-80 (NH-80) पर मंगलवार की रात मूसलाधार बारिश के बाद स्थिति बद से बदतर हो गई। तेलिया तालाब से लेकर बरियारपुर तक करीब 13 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया। रात ढाई बजे से लेकर बुधवार सुबह आठ बजे तक कांवड़ियों की गाड़ियों के साथ-साथ मालवाहक ट्रक और यात्री बसें घंटों जाम में फंसी रहीं।
सड़क किनारे जमा अत्यधिक कीचड़ और मिट्टी के कटाव ने पूरे यातायात तंत्र को ठप कर दिया, जिससे यात्रियों और कांवड़ियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा।
मिट्टी कटाव से संकरी हुई सड़क
बरियारपुर से कल्याणपुर के बीच बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क किनारे मिट्टी का भारी कटाव हो गया, जिससे एनएच बेहद संकरा हो गया। आमने-सामने से आ रहे वाहनों के पास होने की जगह न मिलने से जाम बढ़ता चला गया।
कीचड़ से फिसलीं गाड़ियां
श्रावणी मेले के चलते इस मार्ग पर कांवड़िया वाहनों का दबाव पहले से ही काफी अधिक था। सड़क पर कीचड़ के कारण कई वाहन फिसलने लगे, जिससे खतरा और बढ़ गया। कई कांवड़िया वाहन देर रात तक जाम में अटके रहे।
हाईवे क्लीयरेंस फोर्स भी रही बेबस
जाम छुड़ाने के लिए तैनात की गई हाईवे क्लीयरेंस फोर्स भी भारी कीचड़ के आगे बेबस नजर आई। परिस्थिति को देखते हुए बुधवार की सुबह ट्रैफिक डीएसपी खुद तेलिया तालाब पहुंचे और पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।
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ट्रैफिक DSP ने संभाला मोर्चा
ट्रैफिक डीएसपी ने बताया कि सड़क पर कीचड़ और फिसलन के कारण वाहनों को एक-एक कर धीरे-धीरे निकाला जा रहा है ताकि कोई हादसा न हो।
जलनिकासी की नहीं है व्यवस्था
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल मानसून में NH-80 के इस हिस्से में यही समस्या खड़ी होती है। प्रशासन द्वारा समय रहते मिट्टी भराई और जलनिकासी का पुख्ता इंतजाम न किए जाने से श्रावणी मेले के दौरान कांवड़ियों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ती है।