एंबुलेंस चालक को मिली ‘क्लीन चिट’ पर ब्रेक, सीएस ने किया खारिज, मुजफ्फरपुर का मामला
मुजफ्फरपुर के मड़वन पीएचसी में एंबुलेंस चालक द्वारा प्रसूता को निजी अस्पताल ले जाने के मामले में सिविल सर्जन ने पीएचसी प्रभारी की क्लीन चिट खारिज कर द ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में भ्रष्टाचार पर इसलिए अंकुश नहीं लग पा रहा है कि विभाग के पदाधिकारी ही भ्रष्ट आचरण वालों का बचाव करने लगते हैं। ताजा मामला जिले के मड़वन पीएचसी का है।
यहां गड़बड़ी करने वाले एंबुलेंस चालक को पीएचसी प्रभारी ने एकतरफा जांच कर क्लीन चिट दे दी। हालांकि सिविल सर्जन की आपत्ति के बाद इसमें कार्रवाई की उम्मीद बाकी है।
मामला सरकारी अस्पताल के बदले निजी अस्पताल में प्रसूता को पहुंचाने का है। मड़वन पीएचसी प्रभारी द्वारा एंबुलेंस चालक को दी गई क्लीन चिट दे दी गई। सिविल सर्जन डा अजय कुमार ने आपत्ति जताई है। समीक्षा के बाद सिविल सर्जन ने रिपोर्ट को एकपक्षीय बताते हुए खारिज कर दिया और दोनों पक्षों का बयान लेकर नई रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
सिविल सर्जन ने बताया कि पीएचसी प्रभारी की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट में केवल एंबुलेंस चालक का पक्ष रखा गया है। रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि मरीज को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, जबकि मरीज के स्वजन ने उनके समक्ष आकर शिकायत की है कि प्रसूता को सीधे एक निजी अस्पताल में ले जाया गया।
सीएस ने पीएचसी प्रभारी को निर्देश दिया है कि वे मरीज और उसके स्वजन का पक्ष भी लें तथा यह जानकारी दें कि फिलहाल मरीज की स्थिति क्या है। साथ ही मामले में लापरवाह कर्मियों को चिह्नित कर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने जिलास्तरीय समीक्षा बैठक में सिविल सर्जन से दो दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। डीएम के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
बेटी को निजी अस्पताल पहुंचाने का आरोप, पिता ने की शिकायत
मडवन थाना क्षेत्र के बड़का गांव निवासी उमाशंकर सहनी ने सिविल सर्जन से मिलकर लिखित शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक जनवरी को वह अपनी पुत्री सोनी को प्रसव के लिए मडवन पीएचसी लेकर गए थे।
खबरें और भी
सुबह करीब साढ़े आठ बजे वहां तैनात चिकित्सक ने प्रसव संभव नहीं बताते हुए एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। आरोप है कि पीएचसी से निकली एम्बुलेंस एसकेएमसीएच ले जाने के बजाय रास्ते में एक निजी अस्पताल से संपर्क कर प्रसूता को वहीं भर्ती करा दिया गया। इस दौरान रेफर पर्ची भी एम्बुलेंस चालक अपने साथ ले गया।
निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर 45 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया और भुगतान नहीं करने पर मरीज को बंधक बनाकर रखने का आरोप भी लगाया गया है।