बिहार में शादी का झांसा देकर तीन साल तक महिला का यौन शोषण, मुजफ्फरपुर में ASI बर्खास्त
एएसआई शांति प्रकाश कुजूर को शादी का झांसा देकर महिला का तीन साल तक यौन शोषण करने के आरोप में ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
एएसआई शांति प्रकाश कुजूर बर्खास्त, यौन शोषण का आरोप।
तीन साल तक शादी का झांसा देकर महिला का शोषण किया।
डीआईजी तिरहुत रेंज ने नैतिक अधमता पर कार्रवाई की।
संजीव कुमार, मुजफ्फरपुर । शादी करने का झांसा देकर तीन वर्षों तक महिला से यौन शोषण करने के मामले में सीतामढ़ी जिला बल के तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक (एएसआइ) शांति प्रकाश कुजूर को तिरहुत रेंज के डीआइजी चंदन कुमार कुशवाहा ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।
वर्तमान में वह मुजफ्फरपुर जिला बल में तैनात है। बताया गया कि सहायक अवर निरीक्षक शांति प्रकाश कुजूर जब सीतामढ़ी के महिन्दवारा थाना में पदस्थापित थे तो एक महिला के साथ तीन वर्षों तक शादी करने का झांसा देकर यौन शोषण किया जाता रहा।
उक्त महिला द्वारा सहायक अवर निरीक्षक पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। इस संबंध में महिला के आवेदन पर सीतामढ़ी के पुपरी थाना में तीन दिसंबर 2021 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला दर्ज करने के बाद महिन्दवारा थाने से गिरफ्तार कर सहायक अवर निरीक्षक को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
निलंबन के साथ चल रही थी विभागीय कार्यवाही
जांच के बाद उस पर चार्जशीट दायर किया गया। उक्त पुलिस पदाधिकारी के इस कुकृत्य एवं भ्रष्ट आचरण के आरोप में 17 फरवरी 2022 से निलंबित करते हुए उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ किया गया था।
इसके संचालन पदाधिकारी के रूप में नजीब अनवर, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सीतामढ़ी को नियुक्त किया गया। सहायक अवर निरीक्षक शांति प्रकाश कुजूर सम्प्रति मुजफ्फरपुर जिलाबल को आवेदिका द्वारा लगाए गए आरोप में दोषी होने का मंतव्य समर्पित किया गया।
सीतामढ़ी एसपी ने दंड अधिरोपण के लिए डीआइजी से किया था अनुरोध
पुलिस अधीक्षक सीतामढ़ी ने जांच प्राधिकार के मंतव्य से सहमत होते हुए दंड अधिरोपण के लिए डीआइजी तिरहुत क्षेत्र से अनुरोध किया। डीआइजी की जांच में तत्कालीन सीतामढ़ी जिला के बल के सहायक अवर निरीक्षक शंति प्रकाश कुजूर सम्प्रति मुजपफरपुर जिलाबल पर नैतिक अधमता के गंभीर आरोप की पुष्टि हुई। इसके बाद बर्खास्त कर दिया गया।
डीआइजी ने कहा, ऐसे पुलिस पदाधिकारी को विभाग में बने रहने का कोई औचित्य नहीं
डीआइजी ने कहा कि पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है। ऐसे में उक्त पदाधिकारी का व्यक्तिगत चरित्र विभाग के लिए अनुकूल नहीं है। इस तरह के निकृष्ट एवं भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पुलिस पदाधिकारी व पुलिसकर्मी को विभाग में बने रहने से आमजन के साथ-साथ संगठन के अन्य पुलिसकर्मियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ऐसे पुलिस पदाधिकारी को पुलिस विभाग में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।
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